केदारनाथ पैदल मार्ग बहाल
प्रशासन और सुरक्षा बलों की मुस्तैदी से करीब 8 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद पैदल ट्रैक को साफ कर यात्रा सुचारू रूप से शुरू कराई गई।
भूस्खलन और यात्रा पर ब्रेक
- अचानक गिरा मलबा: बुधवार तड़के लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर विशालकाय चट्टानें और बोल्डर गिर गए, जिससे रास्ता पूरी तरह ब्लॉक हो गया। [
- सुरक्षित स्थानों पर रोके गए यात्री: भूस्खलन की सूचना मिलते ही जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी (DDMO) नंदन सिंह रजवार ने एहतियात के तौर पर श्रद्धालुओं को सोनप्रयाग और गौरीकुंड जैसे सुरक्षित बेस कैंपों पर ही रोक दिया।
युद्धस्तर पर रेस्क्यू और रेस्टोरेशन
- प्रशासन का क्विक एक्शन: पीडब्ल्यूडी (PWD), स्थानीय पुलिस और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीमें तुरंत भारी मशीनों के साथ मौके पर पहुंचीं।
- जवानों ने संभाला मोर्चा: रास्ता बंद होने की वजह से दोनों तरफ बड़ी संख्या में श्रद्धालु फंस गए थे। उत्तराखंड पुलिस और डीडीआरएफ (DDRF) के जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रियों को हाथ पकड़कर सुरक्षित रूप से प्रभावित हिस्सा पार कराया।
- पैदल मार्ग खुला, घोड़े-खच्चरों पर रोक: लगभग 8 घंटे की सफाई के बाद यात्रियों के चलने के लिए रास्ता बना दिया गया है, लेकिन बड़े पत्थरों को पूरी तरह तोड़ने की प्रक्रिया जारी रहने के कारण फिलहाल घोड़े-खच्चरों की आवाजाही को नियंत्रित किया जा रहा है। NDRF और SDRF की टीमों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।

खराब मौसम का यात्रा पर असर
- श्रद्धालुओं की संख्या में भारी गिरावट: एबीपी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश और जगह-जगह भूस्खलन के डर से लोगों ने अपनी यात्रा टाल दी है, जिससे केदारनाथ आने वाले भक्तों की संख्या में 80% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
यात्रियों के लिए जरूरी प्रशासनिक एडवाइजरी
- बिना अनुमति आगे न बढ़ें: जिला प्रशासन ने साफ किया है कि मौसम विभाग (IMD) के भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए यात्री केवल प्रशासन की अनुमति और मौसम साफ होने पर ही आगे का सफर तय करें। [1, 2, 3]
- संवेदनशील इलाकों से दूरी: पहाड़ों से लगातार पत्थर गिरने (Rockfall) के खतरे को देखते हुए भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रुकने या तस्वीरें लेने की सख्त मनाही है।

