“क्या आप जानते हैं उत्तराखंड के इस शहर का राज?
अलकनंदा नदी के पावन तट पर बसा श्रीनगर शहर केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सभ्यता और संस्कृति का जीवंत दस्तावेज है। 1515 में राजा अजयपाल द्वारा स्थापित…
अलकनंदा नदी के पावन तट पर बसा श्रीनगर शहर केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सभ्यता और संस्कृति का जीवंत दस्तावेज है। 1515 में राजा अजयपाल द्वारा स्थापित…
देवभूमि के पहाड़ आज एक ऐसी चुनौती से जूझ रहे हैं जिसने सदियों पुरानी परंपरा और जीवन को खतरे में डाल दिया है। कभी गांव-गांव की प्यास बुझाने वाले मंगरा और धारे अब इतिहास…
कल्पना कीजिए, एक राजा आदेश देता है कि आपके गांव को या तो भारी टैक्स देना होगा या हर महीने एक ‘नर-बली’ (Human Sacrifice)। जब पूरा गांव डर से कांप…
उत्तराखंड की संस्कृति में ‘रोटना और अरसा’ केवल पकवान नहीं, बल्कि खुशियों और परंपराओं के प्रतीक हैं। 1. अरसा (Arsa) – “पहाड़ों का राजकीय मीठा” अरसा उत्तराखंड की सबसे लोकप्रिय पारंपरिक…
उत्तराखंड की देवभूमि में, चमोली जिले के गोचर में, अलकनंदा नदी के तट पर आज से ऐतिहासिक गोचर मेला का भव्य शुभारंभ हो गया है। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर…
कभी उत्तराखंड के हर गाँव की पहचान रही जांदरे की घरघराहट अब धीरे-धीरे इतिहास के पन्नों में सिमटती जा रही है। पत्थर की यह पारंपरिक चक्की, जिसने सदियों तक पहाड़ी…
उत्तराखंड, जहां एक ओर देश-दुनिया में महाभारत के प्रसंगों का मंचन एक कला और प्रदर्शन के रूप में किया जाता है, वहीं देवभूमि उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में सदियों पुरानी…
ढोल सागर उत्तराखंड की पारम्परिक मौखिक ग्रंथ परंपरा का हिस्सा है। यह कोई लिखित ग्रंथ नहीं है, बल्कि लोक में पीढ़ी-दर-पीढ़ी ढोल-दमाऊं बजाने वाले औजी और ढोकी समुदाय द्वारा याद…
शक्ति, आस्था और सम्मान का ताना-बाना है उच्याणा। मानव जीवन में हर दिन समस्याओं से जूझना एक आम बात है। हर आदमी, हर परिवार किसी न किसी समस्या से जूझता…
अनुसूया देवी मंदिर: एक संक्षिप्त परिचय अनुसूया देवी मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले में गोपेश्वर-चोपटा मोटर मार्ग पर मंडल गांव के पास स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह मंदिर…