7 August 2026

“क्या आप जानते हैं उत्तराखंड के इस शहर का राज?

अलकनंदा नदी के पावन तट पर बसा श्रीनगर शहर केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सभ्यता और संस्कृति का जीवंत दस्तावेज है। 1515 में राजा अजयपाल द्वारा स्थापित यह शहर सदियों तक गढ़वाल रियासत की सत्ता का केंद्र रहा। आज यह शहर अपनी ऐतिहासिक विरासत को समेटे हुए शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
अजयपाल की राजधानी से आधुनिक शहर तक का सफर
इतिहासकारों के अनुसार, श्रीनगर का नाम यहाँ स्थित ‘श्री यंत्र’ के कारण पड़ा। पंवार वंश के राजाओं ने 1815 तक यहाँ से शासन किया। हालांकि, 1894 में गौना झील टूटने से आई विनाशकारी बाढ़ ने पुराने शहर को काफी क्षति पहुंचाई, जिसके बाद वर्तमान श्रीनगर को योजनाबद्ध तरीके से ऊंचाई पर बसाया गया। आज भी यहाँ की गलियों में राजशाही के गौरवशाली अतीत की झलक मिलती है।
आस्था का केंद्र: धारी देवी से कमलेश्वर महादेव तक
श्रीनगर की आध्यात्मिक शक्ति का मुख्य केंद्र ‘सिद्धपीठ धारी देवी’ मंदिर है। अलकनंदा नदी के बीचों-बीच स्थित इस मंदिर की देवी को उत्तराखंड की रक्षक माना जाता है। वहीं, शहर के बीचों-बीच स्थित ‘कमलेश्वर महादेव’ मंदिर का पौराणिक महत्व त्रेतायुग से जुड़ा है, जहाँ भगवान राम ने शिव की तपस्या की थी। यहाँ बैकुंठ चतुर्दशी के अवसर पर होने वाला ‘खड़ा दीया’ अनुष्ठान संतान प्राप्ति की कामना के लिए देशभर में प्रसिद्ध है।
पहाड़ की ‘शिक्षा राजधानी’ (Education Hub)
आज के दौर में श्रीनगर को ‘एजुकेशन हब’ के रूप में जाना जाता है। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय (HNBGU) ने इसे बौद्धिक पहचान दी है। इसके अलावा एनआईटी (NIT) उत्तराखंड और वीर चंद्र सिंह गढ़वाली मेडिकल कॉलेज ने इसे तकनीकी और चिकित्सा शिक्षा का प्रमुख केंद्र बना दिया है। प्रदेशभर से हजारों छात्र यहाँ अपने सुनहरे भविष्य की नींव रखने आते हैं।
विकास की नई उड़ान: ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन
आने वाले समय में श्रीनगर का महत्व और बढ़ने वाला है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत श्रीनगर में रेलवे स्टेशन का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। यह रेल लाइन न केवल स्थानीय लोगों की राह आसान करेगी, बल्कि चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए श्रीनगर एक प्रमुख पड़ाव (Base Camp) बनेगा, जिससे स्थानीय पर्यटन और व्यापार को भारी बूस्ट मिलेगा।
पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र
श्रीनगर के आसपास खिर्सू जैसा खूबसूरत हिल स्टेशन और अलकनंदा का शांत तट पर्यटकों को सुकून देता है। यहाँ का खान-पान और गढ़वाली संस्कृति का मेल इसे यात्रियों के लिए यादगार बनाता है।
  • दूरी: ऋषिकेश से लगभग 105 किमी।
  • प्रमुख मंदिर: धारी देवी, कमलेश्वर महादेव, शंकराचार्य मठ, किलकिलेश्वर महादेव।
  • खासियत: गढ़वाल का सांस्कृतिक एवं शैक्षिक केंद् 

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