अनुसूया देवी मंदिर: एक आध्यात्मिक यात्रा, ट्रेकिंग और प्रकृति का संगम
अनुसूया देवी मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले में गोपेश्वर-चोपटा मोटर मार्ग पर मंडल गांव के पास स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह मंदिर सती अनुसूया को समर्पित है, जो महान ऋषि अत्रि मुनि की पत्नी थीं। इस मंदिर को संतान प्राप्ति के लिए एक बेहद पवित्र और शक्तिशाली स्थान माना जाता है, जहाँ हर साल हज़ारों निःसंतान दंपत्ति आशीर्वाद लेने आते हैं।


यह मंदिर पूरी तरह से मोटर मार्ग से जुड़ा नहीं है। आपको मंडल गांव तक गाड़ी से जाना होगा और उसके बाद पैदल यात्रा करनी होगी।
यह मंदिर पारंपरिक कत्यूरी शैली में बना हुआ है। मंदिर परिसर में देवी अनुसूया की भव्य पाषाण मूर्ति के अलावा, गणेश जी, शिव, पार्वती और दत्तात्रेय की भी मूर्तियां स्थापित हैं।
पैदल रास्ते में आपको 6वीं शताब्दी के कुछ प्राचीन शिलालेख (inscriptions) भी देखने को मिलते हैं, जो इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं।
अनुसूया देवी मंदिर जाने का सबसे अच्छा समय मई से जून और सितंबर से नवंबर के बीच का है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और ट्रेकिंग करना आसान होता है। भारी बारिश के मौसम (जुलाई-अगस्त) में भूस्खलन के खतरे के कारण यहाँ की यात्रा करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, और सर्दियों में (दिसंबर-फरवरी) भारी बर्फबारी हो सकती है।
हर साल दिसंबर के महीने में दत्तात्रेय जयंती के अवसर पर यहाँ एक भव्य दो दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है, जिसे अनुसूया मेला या नौदी मेला भी कहा जाता है। इस मेले में दूर-दूर से श्रद्धालु और निःसंतान दंपत्ति अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आते हैं। कहा जाता है कि इस रात, माता निःसंतान दंपत्तियों को स्वप्न में दर्शन देकर संतान प्राप्ति का आशीर्वाद देती हैं। इस दिन रात भर जागरण और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है।
उपेंद्र पंवार उत्तराखंड की राजनीति,
समाज एवं स्थानीय समाचारों पर
लेखन करते हैं।
Jai Ho