4 August 2026

16 साल का वो ‘सुपरहीरो’ जिसने राजा के खौफनाक फरमान को चुनौती दी: उत्तराखंड की अनसुनी कहानी

कल्पना कीजिए, एक राजा आदेश देता है कि आपके गांव को या तो भारी टैक्स देना होगा या हर महीने एक ‘नर-बली’ (Human Sacrifice)। जब पूरा गांव डर से कांप रहा था, तब एक 16 साल का किशोर आगे आया। उसने न केवल राजा के अहंकार को तोड़ा, बल्कि अपनी आहुति देकर अपने गांव को हमेशा के लिए ‘आजाद’ कर दिया। यह कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, यह कहानी है पौड़ी गढ़वाल के ‘पंथ्या दादा’ की।
1. जब ‘देवभूमि’ के एक गांव पर मंडराया मौत का साया
बात 17वीं सदी की है। पौड़ी का सुमाड़ी गांव (Sumari Village) विद्वानों और पंडितों का केंद्र था। सदियों से यह गांव ‘कर-मुक्त’ (Tax-free) था। लेकिन दरबार के कुछ षड्यंत्रकारियों ने राजा के कान भरे। नतीजा? राजा ने एक क्रूर शर्त रख दी— “या तो सोना-चांदी दो, या बलि के लिए इंसान।”
2. ‘मैं जाऊंगा काल के सामने’
गांव में मातम पसरा था। किसी के पास इतना धन नहीं था और कोई अपनी संतान को खोना नहीं चाहता था। तब चरागाह से लौटते हुए एक किशोर, पंथ्या, ने यह शोर सुना। उसने अपने पिता और ग्रामीणों से कहा— “डरो मत, अगर राजा को बलि ही चाहिए, तो पंथ्या तैयार है। पर याद रहे, यह सुमाड़ी की आखिरी बलि होगी।”
3. धधकते कुंड में छलांग और राजा का कांपता सिंहासन
कहा जाता है कि पंथ्या दादा ने हार नहीं मानी, बल्कि एक ‘मूक क्रांति’ की। उन्होंने सुमाड़ी के काली मंदिर के सामने एक विशाल अग्निकुंड तैयार करवाया। पूरे गांव और राजा के नुमाइंदों के सामने, इस वीर बालक ने हंसते हुए उस धधकती आग में छलांग लगा दी।
उनकी इस शहादत ने पूरे गढ़वाल में विद्रोह की आग भड़का दी। राजा इतना डर गया कि उसने न केवल वह आदेश वापस लिया, बल्कि ताउम्र के लिए सुमाड़ी को कर-मुक्त घोषित कर दिया।
4. आज भी गूंजती है उनकी गाथा
आज जब हम ‘बलिदान’ की बात करते हैं, तो अक्सर बड़े युद्ध याद आते हैं। लेकिन पंथ्या दादा ने बिना किसी हथियार के, सिर्फ अपने आत्मबल से एक दमनकारी व्यवस्था को हरा दिया। उत्तराखंड के सुमाड़ी गांव में आज भी उन्हें एक देवता की तरह पूजा जाता है।
प्रवासियों के लिए संदेश:
आज जो पहाड़ के लोग दिल्ली, मुंबई या विदेश में बैठे हैं, उन्हें यह जानना जरूरी है कि उनकी जड़ों में पंथ्या दादा जैसे वीरों का रक्त है। वे सिर्फ एक ऐतिहासिक पात्र नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा हैं।
 photo : from Google

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