हल्द्वानी के स्कूल में ‘अदृश्य साये’ का खौफ
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हल्द्वानी (नैनीताल)। उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित एक स्कूल में उस समय भारी अफरा-तफरी मच गई, जब यूनिट टेस्ट के दौरान कई छात्राएं अचानक चीखने-चिल्लाने और रोने लगीं। बनभूलपुरा क्षेत्र के ललित आर्य महिला इंटर कॉलेज में हुई इस घटना के बाद इलाके में ‘भूत-प्रेत’ और ‘ऊपरी हवा’ की अफवाहें जंगल की आग की तरह फैल गईं। डर का माहौल ऐसा बना कि छात्राएं रोते हुए स्कूल से बाहर भागने लगीं, जिसके बाद प्रशासन को आनन-फानन में स्कूल की आपातकालीन छुट्टी घोषित करनी पड़ी। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों और स्कूल प्रबंधन ने इसे अंधविश्वास से अलग ‘मास हिस्टीरिया’ (Mass Hysteria) का मामला बताया है।
परीक्षा हॉल में क्या हुआ?
मिली जानकारी के अनुसार, स्कूल में कक्षा 10 और 12 की छात्राओं के यूनिट टेस्ट चल रहे थे। परीक्षा हॉल में सब कुछ सामान्य था कि तभी अचानक 10वीं कक्षा की एक छात्रा की तबीयत बिगड़ी और वह जोर-जोर से चिल्लाने लगी। उसे देखकर आसपास बैठी 4-5 अन्य छात्राएं भी घबरा गईं और वे भी एकाएक चीखने-चिल्लाने और जमीन पर लोटपोट होने लगीं।
छात्राओं को इस तरह रोते और कांपते देख पूरे स्कूल परिसर में दहशत फैल गई। क्लासरूम से निकलकर बच्चे कॉरिडोर की तरफ भागने लगे। देखते ही देखते बात स्कूल से बाहर निकली तो स्थानीय लोग और बच्चों के अभिभावक भी भारी संख्या में स्कूल गेट पर जमा हो गए।
प्रबंधन का त्वरित एक्शन और पुलिस की एंट्री
स्थिति को अनियंत्रित होता देख स्कूल की प्रभारी प्रधानाचार्य और प्रवक्ता नीलम ने तुरंत मोर्चा संभाला। शिक्षकों ने प्रभावित छात्राओं को भीड़ से अलग ले जाकर शांत कराने का प्रयास किया और तुरंत उनके परिजनों को सूचित किया। सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। सुरक्षा और बच्चों के मानसिक तनाव को देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने उस दिन की परीक्षा स्थगित कर तुरंत स्कूल में छुट्टी की घोषणा कर दी।
भूत-प्रेत नहीं, यह ‘मास हिस्टीरिया’ है: विशेषज्ञ
सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल होने और भूत-प्रेत की अफवाहें उड़ने के बाद स्कूल प्रशासन और डॉक्टरों ने स्थिति स्पष्ट की है। स्कूल प्रबंधन ने साफ किया कि परिसर में ऐसी कोई भी अलौकिक या अंधविश्वास से जुड़ी बात नहीं है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यह पूरी तरह से मास हिस्टीरिया (Mass Hysteria) या मास साइकोजेनिक इलनेस का मामला है। इसमें परीक्षा के दबाव, मानसिक तनाव या घबराहट के कारण जब कोई एक बच्चा पैनिक अटैक का शिकार होता है, तो उसे देखकर समूह के अन्य बच्चे भी अवचेतन रूप से वैसा ही व्यवहार (जैसे चीखना, कांपना या बेहोश होना) करने लगते हैं।
अब कैसी है स्थिति?
स्कूल प्रशासन का कहना है कि सभी प्रभावित छात्राओं की स्थिति अब पूरी तरह सामान्य और नियंत्रण में है। बच्चों की काउंसलिंग की जा रही है ताकि उनके मन से परीक्षा का डर और अफवाहों का असर निकाला जा सके। अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी तरह के अंधविश्वास या अफवाहों पर ध्यान न दें।


