नेपाल में आए विनाशकारी जल-प्रलय
काठमांडू/नई दिल्ली: नेपाल और तिब्बत की सीमा पर हुए एक भीषण भूस्खलन और बर्फ की चट्टान खिसकने के बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों अन्य लोग लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नेपाल के कई सीमावर्ती जिलों में पूरा का पूरा बाजार और दर्जनों गांव मलबे के ढेर में तब्दील हो गए हैं। आपदा के कारण करीब 19 मोटर पुल और 40 किलोमीटर से अधिक लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह से बह गया है, जिससे प्रभावित इलाकों का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कट चुका है।
नेपाल सरकार ने सेना, सशस्त्र पुलिस बल और आपदा प्रबंधन की टीमों को युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन में लगा दिया है। उफनती नदियों और चारों तरफ फैले मलबे के बीच फंसे लोगों को निकालने के लिए सेना के 14 हेलिकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। लापता लोगों में करीब 579 विदेशी सैलानी शामिल हैं, जिनमें से 133 भारतीय नागरिक हैं। ये सभी भारतीय श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर की यात्रा और ट्रेकिंग के लिए नेपाल गए थे। मौसम की खराबी और सड़कों के पूरी तरह ध्वस्त होने के कारण राहत और बचाव कर्मियों को सुदूर इलाकों तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भारत सरकार ने भी पड़ोसी देश की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाते हुए वायुसेना के विशेष विमान से 10 टन राहत सामग्री काठमांडू भेजी है।
नेपाल की इस आपदा का सीधा असर अब भारत के मैदानी इलाकों पर भी दिखने लगा है। नेपाल से आने वाली नदियों के उफान को देखते हुए भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती जिलों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। बिहार में गंडक और कोसी नदी के जलस्तर में अचानक हुई भारी बढ़ोतरी को देखते हुए एनडीआरएफ की टीमों को तैनात कर दिया गया है। निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है और दोनों राज्यों के प्रशासनिक अधिकारियों को चौबीसों घंटे स्थिति पर नजर बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।


