7 August 2026

देहरादून के घंटाघर का रोचक इतिहास

देहरादून के घंटाघर का रोचक इतिहास

देहरादून में कई ऐतिहासिक और फेमस और देखने लायक स्थान हैं पर देहरादून के घंटाघर का अपना महत्व है आप देहरादून में रहते हो या यहाँ पर घूमने आये हो और उसके बाद भी आपने घंटघर नहीं देखा तो ये मान लो कि आपने अभी देहरादून अधूरा ही देखा है, देहरादून के घंटाघर एक लैंड मार्क काम करता है क्योकि ये शहर के बीच में है आप देहरादून के घंटाघर को आधार बना कर किसी को भी गंतव्य पर पहुंचने के लिए दिशा निर्देश कर सकते हैं।

देहरादून के घंटाघर कि सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह षट्कोणीय यानी कि छ: कोणों वाला है इसका निर्माण 1948 में प्रारम्भ हुआ जिसकी आधारशिला तत्कालीन उत्तर प्रदेश की राज्यपाल सरोजनी नायडू द्वारा किया गया ( सरोजनी नायडू प्रथम महिला रायपाल ) इस घंटाघर को बनने में चार साल लगे तथा 1953 को लाल बहादुर शास्त्री द्वारा इसका उद्धघाटन किया गया , उस समय देहरादून के घंटाघर के निर्माण का जो खर्चा था वो लगभग 2 लाख आया था।

देहरादून के घंटाघर में देहरादून के स्वतंत्रता सेनानियों का नाम उत्कीर्ण किया गया है साथ ही देहरादून के घंटाघर लाला बलवीर सिंह द्वारा बलिदानो और विकाश का दर्शन भी करता है लाला बलवीर सिंह के बेटे शेर सिंह ने इसका नाम बलवीर टावर रखा था पर अब यह आमतौर पर देहरादून के घंटाघर के नाम से जाना जाता है।

घंटाघर का जो एरिया है वो देहरादून का सबसे व्यस्तम क्षेत्र है जिसके आसपास आपको देहरादून की फेमस दुकाने दिखाई देगी वैसे इसकी जो प्रारंभिक घडिया थी वो दस साल के बाद ख़राब हो चुकी थी पर अब इसमें नयी घडिया लगा कर इसको और आकर्षित बना दिया है। इसकी घडियो के बारे में किसी सज्जन ने एक बात बताई कि देहरादून के घंटाघर कि घडी ख़राब चल रही थी लम्बे समय से 1992 – 93 में एक रात को भूकंप का झटका आया और घडी चले लगी हलाकि उत्तराखंड मंथन इस बात कि कोई पुष्टि नहीं करता है।
तो आप पर्यटक के रूप में जब भी द्रोण नगरी देहरादून आये देहरादून के घंटाघर का भ्रमण जरूर करे

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2 thoughts on “देहरादून के घंटाघर का रोचक इतिहास

  1. बहुत ही अच्छी जानकारी दी सर आपने 🙏🏿🥰🥰🥰

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