भारी ड्रामे के बीच 31 मिनट में बजट समेत 10 विधेयक पास, विधायक उमेश कुमार का इस्तीफा
गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में आयोजित उत्तराखंड विधानसभा का दो दिवसीय सत्र भारी हंगामे और ड्रामे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने विपक्ष के तीखे विरोध के बावजूद महज 11 घंटे से भी कम समय की कुल कार्यवाही में सभी विधायी कार्य निपटा लिए। सत्र के आखिरी दिन विपक्ष के भारी शोर-शराबे और नारेबाजी के बीच सरकार ने 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट ध्वनि मत से पारित कर दिया। इस नए बजट के साथ ही उत्तराखंड के वर्तमान वित्तीय वर्ष के कुल बजट का आकार बढ़कर 1.19 लाख करोड़ रुपये हो गया है। बजट में मुख्य रूप से पूंजीगत मद, महाकुंभ-2027 की तैयारियां, गैरसैंण जलापूर्ति बांध परियोजना, आयुष्मान योजना और खेल विश्वविद्यालय के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान किया गया है।
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण के संचालन में विपक्ष के भारी हंगामे के बीच महज 31 मिनट के भीतर अनुपूरक बजट समेत कुल 10 महत्वपूर्ण विधेयक पारित कर दिए गए, जिसके तुरंत बाद दोपहर करीब 1:10 बजे सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इस सत्र का सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ खानपुर सीट से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार का विधानसभा सदस्यता से अचानक इस्तीफा रहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले साढ़े चार साल में जब भी उन्होंने हरिद्वार के किसानों, आपदा पीड़ितों या जनता से जुड़े बड़े मुद्दे उठाए, तो विपक्ष ने उनका साथ नहीं दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर सचिवालय को आगे की कानूनी जांच के लिए भेज दिया है।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने सदन के भीतर और बाहर सरकार को घेरा। कांग्रेसी विधायक सदन के वेल में काले झंडे लेकर उतर आए, नारेबाजी की और हवा में कागज के टुकड़े उछाले। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जनहित के मुद्दों पर चर्चा से भाग रही है और इतने छोटे सत्र में विधायकों को जनता की समस्याओं को उठाने का पर्याप्त समय नहीं मिला। शून्यकाल के दौरान कांग्रेस ने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले को लेकर भी भारी हंगामा किया। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष का इरादा चर्चा करना नहीं, बल्कि केवल हंगामा खड़ा करना था और सरकार ने तय समय में अपने सभी विधायी कार्य पूरी जिम्मेदारी से निपटाए हैं।

