शिव-पार्वती के विवाह का साक्षी ”त्रियुगीनारायण मंदिर”
रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड का ऐतिहासिक और पौराणिक त्रियुगीनारायण मंदिर (Triyuginarayan Temple) अब वैश्विक पटल पर एक नए रूप में चमकने जा रहा है [pioneeredge.in]. देवभूमि उत्तराखंड सरकार ने इस पावन स्थल को ‘वैदिक टूरिज्म विलेज’ के रूप में विकसित करने के लिए विशेष डेस्टिनेशन प्लान को हरी झंडी दे दी है
इस योजना के तहत क्षेत्र के ट्रेकिंग रूटों की जीपीएस (GPS) मैपिंग की जा रही है और स्थानीय स्तर पर होमस्टे को बढ़ावा देने के लिए सरकारी अनुदान को भी बढ़ा दिया गया है। आइए जानते हैं क्यों देश-विदेश के श्रद्धालुओं और युवाओं के बीच यह मंदिर सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बनता जा रहा है।
🔥 3 युगों से जल रही है अखंड धूनी, यहीं बंधा था शिव-पार्वती का अटूट बंधन
समुद्र तल से करीब 1,980 मीटर की ऊंचाई पर स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर का इतिहास बेहद अलौकिक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सतयुग में इसी स्थान पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था।
- अखंड धूनी (Eternal Flame): मंदिर परिसर में मौजूद हवन कुंड की अग्नि तीन युगों (सतयुग, त्रेता, द्वापर) से आज तक लगातार जल रही है। इसी पवित्र अग्नि को साक्षी मानकर महादेव और माता पार्वती ने सात फेरे लिए थे। यही कारण है कि इसे ‘अखंड धूनी मंदिर’ भी कहा जाता है।
- ब्रह्मा जी बने थे पुरोहित: इस दिव्य विवाह में सृष्टिकर्ता भगवान ब्रह्मा पुरोहित (पुजारी) बने थे, जबकि भगवान विष्णु ने माता पार्वती के भाई के रूप में ‘कन्यादान’ की रस्में निभाई थीं। विवाह स्थल पर आज भी ‘ब्रह्मा शिला’ मौजूद है।
🕉️ केदारनाथ जैसी वास्तुकला, विष्णु जी हैं मुख्य देवता
भले ही यह स्थान शिव-पार्वती के विवाह के लिए जगत प्रसिद्ध है, लेकिन मूल रूप से यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। यहां विष्णु जी की दो फीट की अत्यंत सुंदर चांदी की मूर्ति स्थापित है। मंदिर की भव्य वास्तुकला पूरी तरह से केदारनाथ मंदिर जैसी है, जिसका जीर्णोद्धार आदि शंकराचार्य जी ने करवाया था।
परिसर में चार पवित्र कुंड हैं—रुद्र कुंड, विष्णु कुंड, ब्रह्मा कुंड और सरस्वती कुंड। इनमें बहने वाले पानी का स्रोत भगवान विष्णु की नाभि से निकली ‘सरस्वती गंगा’ धारा को माना जाता है।
💍 ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ का सबसे बड़ा केंद्र बना त्रियुगीनारायण
पिछले कुछ वर्षों में यह मंदिर भारत के सबसे प्रीमियम और पवित्र वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में उभरा है [triyuginarayanweddingdestination.com]. आम लोगों से लेकर बड़े-बड़े सेलिब्रिटीज और उद्योगपति सात जन्मों के अटूट बंधन में बंधने के लिए यहां पहुंच रहे हैं [triyuginarayanweddingdestination.com]।
पोर्टल पाठकों के लिए जरूरी गाइडलाइंस (यदि आप यहां शादी प्लान कर रहे हैं):
- सीमित मेहमान: मंदिर की मर्यादा और व्यवस्था को देखते हुए यहां बड़े बैंड-बाजे या भारी भीड़ (आदर्श रूप से 50 मेहमानों तक) की अनुमति नहीं है।
- कैसे होती है बुकिंग: विवाह के लिए दूल्हा-दुल्हन के जरूरी दस्तावेजों के साथ स्थानीय मंदिर समिति से अनुमति लेनी होती है। इसके अलावा, गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) भी यहां विशेष विवाह पैकेज और ठहरने की व्यवस्था उपलब्ध कराता है [gmvnonline.com].
- जाने का सही समय: यहां जाने या विवाह के लिए अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर का महीना सबसे मुफीद माना जाता है। मानसून में भूस्खलन और सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण रास्ते प्रभावित रहते हैं।


