3 August 2026

कैसे आपस में मिलती हैं दो अलग रंगों की नदियां!

प्रकृति के इस अद्भुत नजारे को देखिए। जहाँ तक नजर जाए, वहाँ आपको दो अलग-अलग रंगों की पानी की धाराएं आपस में मिलती हुई दिखाई देंगी। यह खूबसूरत नजारा है उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित जौलजीबी का। यहाँ भारत-नेपाल बॉर्डर पर ‘काली’ और ‘गोरी’ नदी का एक ऐसा संगम होता है, जिसे देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हैं और श्रद्धालु इसे ईश्वर का चमत्कार मानते हैं।
अगर बात करें काली नदी की, तो यह लिपुलेख दर्रे के पास ‘कालापानी’ से निकलती है। इसका पानी काफी गहरा और मटमैला होता है, इसलिए इसे काली नदी कहा जाता है। यह नदी बेहद शांत लेकिन बहुत गहरी चाल से आगे बढ़ती है और यही नदी भारत और नेपाल के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमा भी तय करती है।
वहीं दूसरी तरफ से आती है गोरी नदी, जिसे स्थानीय लोग गोरीगंगा भी कहते हैं। यह नदी मल्ला जोहार के प्रसिद्ध ‘मिलम ग्लेशियर’ की बर्फ पिघलने से बनती है। बर्फ के पानी के कारण इसका रंग एकदम दूधिया सफेद और चमकीला होता है। पहाड़ों से सीधे नीचे उतरने के कारण इसका बहाव इतना तेज और पथरीला होता है कि इसकी आवाज दूर-दूर तक गूंजती है।
जब जौलजीबी में इन दोनों नदियों का मिलन होता है, तो शांत काली नदी इस चंचल गोरी नदी को अपने आगोश में समेट लेती है। धार्मिक दृष्टिकोण से इस संगम को बेहद पवित्र माना गया है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, आदि कैलाश और मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु यहाँ स्नान कर संगम तट पर बने प्राचीन ज्वालेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। आज भी देश-विदेश से लोग कुदरत के इस बेजोड़ संगम को देखने पिथौरागढ़ पहुंचते हैं।

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