7 August 2026

दिव्यांग जाने अपने विशेष अधिकारों को : शाह

दिव्यांग जाने अपने विशेष अधिकारों को : शाह (Disabled people should know their special rights: Shah)

दिव्यांग जन समाज का अभिन्न अंग हैं उनके लिए सरकारों द्वारा अनेको अनेक सुविधाए और अधिकार प्रदत किये जाते है। पर यहाँ पर ये सवाल उठता है कि क्या इन अधिकारों कि जानकारी प्रत्येक दिव्यांग जनो को है ? इस टॉपिक को लेकर आज हम करते हैं श्री गणेश शाह से जो कि ब्लाक रिसोर्स पर्सन (विशेष शिक्षा) समग्र शिक्षा अभियान कार्यालय ब्लाक संसाधन कक्ष राजकीय अन्तर कॉलेज मेहुवाला ब्लाक रायपुर देहरादून है आगे हम उन से बातचित के अंश को पड़ेगे जिससे दिव्यांग जन को अपने अधिकार सभबन्धी जानकारिया प्राप्त होंगी।

उत्तराखंड मंथन : गणेश शाह जी नमस्कार
गणेश शाह : नमस्कार

उत्तराखंड मंथन : दिव्यांग जनो के जीवन में शिक्षा का क्या महत्व है

गणेश शाह :दिव्यांग जनो के जीवन में शिक्षा का बहुत महत्व है जीवन में सफलता प्राप्त करना और कुछ अलग करने के लिए शिक्षा सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है यह हमे कठिन समय में चुनोतियो से सामना करने के लिए सहायता करता है, दिव्यांग जनो के लिए शिक्षा जीवन का आधार है उनकी सामाजिक और भावनात्मक जरूरते पूरी करता है, सहायक वातारण निर्मित करने के लिए बहुत जरुरी है कि दिव्यांग जनो में शिक्षा का समावेश जरुरी है।

उत्तराखंड मंथन :सरकारों कि तरफ से दिव्यांग विधार्थियो के लिए क्या क्या सुविधायेंदी जाती है ?
गणेश शाह :  दिव्यांग छात्र / छात्राओं के लिए क्लास एक से नो तक शिक्षा के निम्न दरों एवं मानकों के अनुसार छात्रविर्ती प्रदान कि जाती है। दिव्यांग छात्र / छात्राओं को किसी भी शैक्षिक संसथान में प्रवेश दिया जायेगा अगर दिव्यांग को जिला मुख्य चिकितसाह अधिकारी से 40 % दिव्यांग प्रमाण पत्र निर्गीत हो। दिव्यांग छात्र / छात्राओं कि पहचान कर के उनके लिए वार्षिक चिकित्षा शिविर लगता है। दिव्यांग छात्र / छात्राओं के लिए मुफ्त सहायता उपकरण प्रदान करवाना। दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों कि कॉन्सलिंग करवाना। दृस्तिहिं बच्चों के लिए ब्रेल लिपि कि व्यवस्ताकरवाना। जो दिव्यांगजन व्हीलचेयर का प्रयोग करते हैं उनके लिए स्कूल , कॉलेज में रेम्प का निर्माण आवश्यक है।

उत्तराखंड मंथन :शाह जी आप से एक बात जननी है स्कूल कॉलेज में रेम्प का होना दिव्यांग का अधिकार है या ये स्कूल कॉलेज कि सहानभूति पर निर्भर है?
गणेश शाह :नहीं बिलकुल भी सहानभूति का विषय नहीं है यह दिव्यांग का अधिकार है , एक्ट 2016 के तहत स्कूल कॉलेज में रेम्प रेलिंग का होना आवश्यक है ताकि दिव्यांग को स्कूल आने में कोई दिक्क्त का सामना ना करना पड़े यदि कोई विधयलय इसकी अनदेखी करता है तो RPWD एक्ट की धारा 89 के तहत दस हजार से लेकर पांच लाख तक का जुर्माना लग सकता है

उत्तराखंड मंथन :शाह जी दिव्यांग जनो के ऐसे कितने अधिकार हैं जिनको की दिव्यांगजन नहीं जानते हैं ?
गणेश शाह :आपने ये अच्छा सवाल किया है , कई ऐसे दिव्यांग जनो के अधिकार हैं जिनको खुद दिव्यांग नहीं जानते हैं जैसे दिव्यांग जन अधिकार अधिनियम 2016 , सयुक्त राष्ट कई महासभा ने 13 दिसंबर 2008 को अंगीकृत किया था।
इसके साथ ही समावेशी शिक्षा ऐसी शिक्षा पद्यति है जिसमे दिव्यांग और गैर दिव्यांग साथ साथ शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं ।
दिव्यांगों को सुरक्षा और संरक्षण का अधिकार
दिव्यांगकौशल विकास और नियोजन का अधिकार
दिव्यांगसामान नीति का अधिकार
दिव्यांग रोजगार में आरक्षण एक अधिकार
दिव्यांग परिवहन का अधिकार
दिव्यांग केंद्रीय और राज्य दिव्यांग सलाहकार बोर्ड का गठन
दिव्यांग विशेष न्ययालय का अधिकार।

 

उत्तराखंड मंथन : शाह जी अंतिम सवाल दिव्यांग किस तरह से समाज का अभिन्न अंग है?

गणेश शाह : बिलकुल समाज का अभिन्न अंग है दिव्यांग जनो की खुशी के लिए ौरी दुनिया प्रतिबद्ध हो इनके प्रति लोग किसी प्रकार का भेदभाव ना रखे समाज इनके सम्मान और सुविधाओं के लिए सरकार को नैतिक सन्देश प्रेषित करे , दिव्यांग आज समाज में IAS है PCS है चिकित्षक है इंजीनियर हैं,कवि हैं ,शिक्षक हैं , हर छेत्र में समाज के साथ कन्धा मिलकर काम किया है तो किसी भी दिव्यांग को ऐसा नहीं समझा जा सकता कि वो समाज का अभिन्न अंग नहीं है।

उत्तराखंड मंथन :धन्यवाद शाह जी समय देने के लिए आगे भी आप से दिव्यांग कल्याण के संबंध में बात चर्चा करते रहेंगे
गणेश शाह :में सदैव चर्चा के लिए तैयार हु , धन्यवाद्|

 

 

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *