देहरादून/ऋषिकेश: उत्तराखंड और हरियाणा के बीच बीते कुछ दिनों से शुरू हुआ विवाद अब थमता नजर नहीं आ रहा है। बीती 21 मई को ऋषिकेश में हुई एक घटना के बाद भड़की यह चिंगारी अब सामाजिक और व्यापारिक स्तर पर बड़ी चिंता का सबब बन चुकी है। जो विवाद पहले सोशल मीडिया पर केवल रील्स और वीडियो तक सीमित था, वह अब जमीनी स्तर पर असर दिखाने लगा है।

ऋषिकेश से हुई शुरुआत
दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत 21 मई को ऋषिकेश के काली की ढाली क्षेत्र में हुई थी। आरोप है कि हरियाणा के कैथल से आए कुछ पर्यटकों ने एक स्थानीय महिला और उसकी बेटी के साथ अभद्रता की। इसके बाद गुस्साए स्थानीय लोगों ने पर्यटकों के साथ मारपीट की, उनकी गाड़ी में तोड़फोड़ की और उन्हें गंभीर रूप से प्रताड़ित किया। इस मारपीट का वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो हरियाणा के लोगों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का गुस्सा भड़क उठा।
दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत 21 मई को ऋषिकेश के काली की ढाली क्षेत्र में हुई थी। आरोप है कि हरियाणा के कैथल से आए कुछ पर्यटकों ने एक स्थानीय महिला और उसकी बेटी के साथ अभद्रता की। इसके बाद गुस्साए स्थानीय लोगों ने पर्यटकों के साथ मारपीट की, उनकी गाड़ी में तोड़फोड़ की और उन्हें गंभीर रूप से प्रताड़ित किया। इस मारपीट का वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो हरियाणा के लोगों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स का गुस्सा भड़क उठा।

इन्फ्लुएंसर्स ने भड़काई आग, ‘बॉयकॉट उत्तराखंड’ का ट्रेंड
वीडियो वायरल होने के बाद हरियाणा के कई बड़े सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने उत्तराखंड के खिलाफ तीखे बयान जारी किए और ‘बॉयकॉट उत्तराखंड’ (#BoycottUttarakhand) का ट्रेंड शुरू कर दिया। उनका तर्क था कि हरियाणा के लोग उत्तराखंड के पर्यटन की रीढ़ हैं और वहां हरियाणा नंबर (HR) की गाड़ियों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। जवाब में उत्तराखंड के इन्फ्लुएंसर्स ने भी पहाड़ी संस्कृति, देवभूमि की मर्यादा और हुड़दंगियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
वीडियो वायरल होने के बाद हरियाणा के कई बड़े सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने उत्तराखंड के खिलाफ तीखे बयान जारी किए और ‘बॉयकॉट उत्तराखंड’ (#BoycottUttarakhand) का ट्रेंड शुरू कर दिया। उनका तर्क था कि हरियाणा के लोग उत्तराखंड के पर्यटन की रीढ़ हैं और वहां हरियाणा नंबर (HR) की गाड़ियों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। जवाब में उत्तराखंड के इन्फ्लुएंसर्स ने भी पहाड़ी संस्कृति, देवभूमि की मर्यादा और हुड़दंगियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
दिल्ली एयरपोर्ट पर उत्तराखंड के ड्राइवर को रोका
तनाव उस समय और बढ़ गया जब दिल्ली एयरपोर्ट के टैक्सी पार्किंग से एक नया वीडियो सामने आया। वीडियो में देखा जा सकता है कि हरियाणा और दिल्ली के कुछ टैक्सी ड्राइवरों ने देहरादून नंबर की एक टैक्सी को घेर लिया और ड्राइवर को सवारी बैठाने से रोक दिया। उसे चेतावनी दी गई कि ‘दोबारा एयरपोर्ट पर मत दिखना’। ड्राइवरों का कहना था कि जब उनकी गाड़ियां उत्तराखंड जाती हैं, तो स्थानीय लोग उनके साथ बदसलूकी करते हैं।
तनाव उस समय और बढ़ गया जब दिल्ली एयरपोर्ट के टैक्सी पार्किंग से एक नया वीडियो सामने आया। वीडियो में देखा जा सकता है कि हरियाणा और दिल्ली के कुछ टैक्सी ड्राइवरों ने देहरादून नंबर की एक टैक्सी को घेर लिया और ड्राइवर को सवारी बैठाने से रोक दिया। उसे चेतावनी दी गई कि ‘दोबारा एयरपोर्ट पर मत दिखना’। ड्राइवरों का कहना था कि जब उनकी गाड़ियां उत्तराखंड जाती हैं, तो स्थानीय लोग उनके साथ बदसलूकी करते हैं।
कानून-व्यवस्था और व्यापार पर संकट
इस क्षेत्रीय तनाव की वजह से दोनों राज्यों के आम लोग, टैक्सी कारोबारी और छोटे व्यापारी बेहद चिंतित हैं। उत्तराखंड में केदारनाथ, बदरीनाथ और हरिद्वार आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दिल्ली-एनसीआर में काम करने वाले उत्तराखंड के युवाओं में भी असुरक्षा की भावना पनप रही है।
इस क्षेत्रीय तनाव की वजह से दोनों राज्यों के आम लोग, टैक्सी कारोबारी और छोटे व्यापारी बेहद चिंतित हैं। उत्तराखंड में केदारनाथ, बदरीनाथ और हरिद्वार आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दिल्ली-एनसीआर में काम करने वाले उत्तराखंड के युवाओं में भी असुरक्षा की भावना पनप रही है।
प्रशासनिक स्तर पर शांति की अपील
बुद्धिजीवियों और दोनों पक्षों के जिम्मेदार नागरिकों का कहना है कि कुछ उपद्रवियों की गलती की सजा पूरे राज्य या समाज को नहीं दी जा सकती। सोशल मीडिया के व्यूज और क्षेत्रीय अहंकार के कारण पैदा हुए इस विवाद को सुलझाने के लिए दोनों राज्यों की पुलिस और प्रशासन को तत्काल ठोस कदम उठाने की जरूरत है ताकि अफवाहों और हेट स्पीच को रोका जा सके।
बुद्धिजीवियों और दोनों पक्षों के जिम्मेदार नागरिकों का कहना है कि कुछ उपद्रवियों की गलती की सजा पूरे राज्य या समाज को नहीं दी जा सकती। सोशल मीडिया के व्यूज और क्षेत्रीय अहंकार के कारण पैदा हुए इस विवाद को सुलझाने के लिए दोनों राज्यों की पुलिस और प्रशासन को तत्काल ठोस कदम उठाने की जरूरत है ताकि अफवाहों और हेट स्पीच को रोका जा सके।

