
रूपकुंड (Roopkund) उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित एक रहस्यमयी हिमनद झील है, जिसे “कंकालों की झील” (Skeleton Lake) के नाम से भी जाना जाता है. यह झील लगभग 5,029 मीटर (16,499 फीट) की ऊंचाई पर, त्रिशूल और नंदा घुंटी चोटियों के बीच, हिमालय की गोद में बसी हुई है.

रूपकुंड से जुड़ी मुख्य बातें:
- कंकालों का रहस्य: इस झील की सबसे बड़ी खासियत इसके किनारे और पानी में पाए जाने वाले सैकड़ों मानव कंकाल हैं. जब सर्दियों में बर्फ पिघलती है, तो ये कंकाल साफ दिखाई देते हैं. इन कंकालों को पहली बार 1942 में एक ब्रिटिश वन रक्षक द्वारा खोजा गया था.
- मौत का कारण: इन कंकालों की मौत का कारण लंबे समय से एक रहस्य बना हुआ था, जिस पर कई सिद्धांत और स्थानीय लोककथाएं प्रचलित हैं.
- प्राचीन मान्यता: एक लोकप्रिय मान्यता के अनुसार, ये कंकाल 9वीं शताब्दी में राजा जसधवल और उनकी गर्भवती पत्नी रानी बलम्पा के एक बड़े दल के हैं, जो नंदा देवी की तीर्थयात्रा पर थे. कहा जाता है कि उन्होंने यात्रा के नियमों का पालन नहीं किया, जिससे देवी क्रोधित हो गईं और एक भीषण ओलावृष्टि में उनका पूरा दल खत्म हो गया.
- वैज्ञानिक शोध: हाल के वैज्ञानिक अध्ययनों (2019 में प्रकाशित एक शोध) ने इस रहस्य को और गहरा कर दिया है. डीएनए विश्लेषण और रेडियोकार्बन डेटिंग से पता चला है कि ये कंकाल एक ही समय के नहीं हैं, बल्कि ये अलग-अलग समय अवधि (लगभग 800 ईस्वी से 1800 ईस्वी तक) के हैं.
- एक बड़ा समूह (लगभग 23 व्यक्ति) दक्षिण एशियाई वंश का है, जिनकी मृत्यु लगभग 800 ईस्वी में हुई थी.
- एक छोटा समूह (लगभग 14 व्यक्ति) पूर्वी भूमध्यसागरीय (Eastern Mediterranean) वंश का है, जो मुख्य रूप से ग्रीस और क्रेते से संबंधित प्रतीत होते हैं. इनकी मृत्यु लगभग 1800 ईस्वी में हुई थी.
- एक व्यक्ति दक्षिण पूर्व एशियाई वंश का भी पाया गया है.
- वैज्ञानिकों ने यह भी निष्कर्ष निकाला है कि कंकालों के सिर और कंधों पर गंभीर चोट के निशान हैं, जो क्रिकेट बॉल के आकार के बड़े ओलों से लगे हो सकते हैं. यह स्थानीय लोककथाओं से मेल खाता है.
- संरक्षण की चिंता: पर्यटकों और ट्रेकर्स द्वारा कंकालों को अपने साथ ले जाने के कारण इन कंकालों के नुकसान की चिंता बढ़ती जा रही है. स्थानीय प्रशासन इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिए कदम उठाने की आवश्यकता जता रहा है.

ट्रेकिंग और पर्यटन:
रूपकुंड एक बेहद लोकप्रिय ट्रेकिंग गंतव्य है और अपने मनमोहक प्राकृतिक सौंदर्य और रहस्यमय इतिहास के लिए जाना जाता है.
- ट्रेल: रूपकुंड ट्रेक गहरे ओक के जंगलों, हरी-भरी घास के मैदानों (बुग्यालों), और बर्फ से ढकी चोटियों से होकर गुजरता है. अली बुग्याल और बेदनी बुग्याल इस ट्रेक के प्रमुख आकर्षण हैं.
- चोटियों के दृश्य: ट्रेक के दौरान त्रिशूल, नंदा घुंटी, नीलकंठ, केदारनाथ, चौखंभा रेंज जैसी कई ऊंची चोटियों के शानदार दृश्य दिखाई देते हैं.
- सर्वोत्तम समय: रूपकुंड की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय मई के अंत से अक्टूबर तक का है, जब बर्फ पिघलती है और कंकाल दिखाई देते हैं.
- कठिनाई: यह ट्रेक मध्यम से कठिन स्तर का माना जाता है और अनुभवी ट्रेकर्स के लिए उपयुक्त है.
रूपकुंड अपनी खूबसूरती और रहस्य दोनों के लिए एक अनूठी जगह है, जो इसे भारत के सबसे आकर्षक ट्रेकिंग स्थलों में से एक बनाती
