बिना किसी रस्सी के 280 किमी का सफर! आखिर कौन है यह रहस्यमयी ‘चौसिंग्या खाडू’?
उत्तराखंड की विश्वप्रसिद्ध नंदा देवी राज जात यात्रा में शामिल होने वाले चार सींगों वाले रहस्यमयी मेढ़े (चौसिंग्या खाडू) को लेकर श्रद्धालुओं के बीच भारी कौतूहल और श्रद्धा देखी जा रही है। हिमालय के महाकुंभ के रूप में पहचानी जाने वाली इस बेहद दुर्गम और पवित्र धार्मिक यात्रा में इस अनोखे खाडू को साक्षात माता नंदा का दिव्य दूत और अगुआ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सामान्य भेड़ों के विपरीत इस खाडू के चार सींग होते हैं और इसका जन्म होना ही इस बात का संकेत माना जाता है कि अब माता नंदा अपने मायके से ससुराल (कैलाश पर्वत) जाने के लिए तैयार हैं। करीब 280 किलोमीटर की इस बेहद कठिन हिमालयी यात्रा के दौरान यह खाडू बिना किसी रस्सी के और बिना किसी के हांके, पूरी श्रद्धा के साथ माता की डोली के आगे-आगे खुद-ब-खुद चलता है।
इसकी पीठ पर मायके वालों द्वारा माता के लिए भेजा गया शृंगार और कलेऊ रखा जाता है। यात्रा के अंतिम पड़ाव ‘होमकुंड’ में विशेष पूजा-अर्चना और यज्ञ के बाद जब इसे विदा किया जाता है, तो यह इंसानी आंखों से ओझल होकर अकेले ही कैलाश पर्वत की ओर निकल जाता है, जो आज भी विज्ञान के लिए एक अनसुलझा रहस्य बना हुआ है।
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