7 August 2026

विश्व धरोहर रम्माण उत्तराखण्ड का गौरव

विश्व प्रसिद्ध रम्माण उत्सव

यह उत्‍सव चमोली जनपद में हर साल अप्रैल माह में होता है। स्‍थानीय कलाकार प्राचीन मुखौटा परंपराओं के साथ रामायण को लोक शैली में प्रस्तुति देते हैं ।


रम्माण का मुख्य आधार रामायण की मूलकथा है। उत्तराखंड की प्राचीन मुखौटा परंपराओं के साथ जुड़कर रामायण ने स्थानीय रूप ग्रहण किया। बाद में रामायण रम्माण बन गई। पूरे पखवाड़े चलने वाले कार्यक्रम के लिए इस नाम का प्रयोग होने लगा। रम्माण में रामायण के चुनिंदा प्रसंगों को लोक शैली में प्रस्तुतिकरण होता है।

इसमें 18 मुखौटे 18 ताल, 12 ढोल, 12 दमाऊं, 8 भंकोरे का प्रयोग होता है। इसके अलावा रामजन्म, वनगमन, स्वर्ण मृग वध, सीता हरण और लंका दहन का मंचन ढोलों की थापों पर किया गया।
रम्माण के अंत में भूम्याल देवता प्रकट होते हैं। समस्त ग्रामीण भूम्याल देवता को एक परिवार विशेष के घर विदाई देने पहुंचते हैं। उसी परिवार द्वारा साल भर भूम्याल देवता की पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद उस घर के आंगन में प्रसाद बांटा जाता है। इसके साथ ही इस पौराणिक आयोजन का समापन होता है।
यह रम्माण श्री बदरीनाथ धाम के जोशीमठ के निकट सलूड ग्राम में भव्य रूप से मनाया जाता ह

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