पांच केदार सीरीज (1 – केदारनाथ )

उत्तराखंड में जिस तरह पांच बद्री और पांच प्रयागो का महत्व है उसी तरह पांच केदार का भी अपना महत्व है , इसलिए उत्तराखंड मंथन यहाँ पंच केदार की सीरीज के बारे में अपने पाठको को बताएगा
केदारनाथ रुद्रप्रयाग जनपद में पड़ता है जो देश के १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक है यहाँ पर शिवलिंग की पूजा होती है जो बैल के पृष्ठ भाग की पूजा होती है और अग्र भाग की पूजा नेपाल के पशुपतिनाथ में होती है गौरीकुंड से लगभग 15 किमी पैदल यात्रा कर के केदारनाथ पंहुचा जाता है , पुराणों में सम्पूर्ण गढ़वाल क्षेत्र को केदार खंड कहा जाता था।

ऐसी मान्यता है कि महाभारत के युद्ध के बाद पांडव इस बात से आत्म ग्लानि से भर गए थे उन्होंने युद्ध में अपने ही सगे सम्बधियो की हत्या की है जिससे मुक्ति पाने के लिए वो भगवन शंकर के दर्शन करना चाहते थे , भगवान शंकर कि खोज में जब उनको शंकर भगवान के दर्शन तो हुए पर पांडव उनसे मुलाकात नहीं कर पाए क्युकी भगवन शंकर केदारनाथ से भूमिगत हो गए , भूमिगत होते समय पांडवो ने उन्हें पकड़ने का प्रयास तो किया पर वो केवल पृष्ट भूमि को ही पकड़ पाए और वो हिंसा पत्थर का बन गया और पांडवो ने उसी को शंकर भगवान मान कर उसकी पूजा प्रारम्भ की जो अभी तक जारी है , भूमिगत शेष हिस्सा हिस्सा नेपाल के पशुपतिनाथ में आज भी पूजा जाता है
