7 August 2026

उत्तराखंड के पंच बदरी सीरीज  (1 – बदरीनाथ ) PANCH BADARI – BADRINATH 

उत्तराखंड के पंच बदरी सीरीज  (1 – बदरीनाथ )

PANCH BADARI – BADRINATH 

उत्तराखंड में पंच यानी कि पांच बद्री हैं जिसमे पहले क्रम पर बद्री विशाल आता है क्या है विशेषता बद्रीनाथ और बद्रीनाथ मंदिर की –

हिन्दुओ का प्रषिद तीर्थ है बदरीनाथ जहाँ भगवान विष्णु की पूजा होती है बदरीनाथ जनपद चमोली में पड़ता है बदरीनाथ यह धाम अलकनंदा नदी के किनारे पर है, बरदीनाथ मंदिर के निर्माण का प्रमाण 7 वी से 8 वी सदी के मिलते हैं समुद्र तल से बद्रीनाथ की उचाई 3133 मीटर है।  बरदीनाथ मदिर में “बदरीनारायण” की पूजा होती है जो की भगवान विष्णु जी का अवतार माना जाता है बदरीनाथ में बद्रीनारायण जी की एक मीटर लम्बी शालिग्राम से बनी मूर्ति है, मान्यता है कि इस मूर्ति को आदि गुरु शंकराचार्य ने 8 वी शताब्दी में नारद कुंड ने निकाला था, कई हिन्दुओ का मत यह भी है कि यह प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई है, केरल राज्य के नम्बूदरी सम्प्रयदाय के ब्राम्हण बद्रीनाथ के मुख्य पुजारी होते हैं जिनको “रावल” कहा जाता है। बद्रीनाथ मंदिर कि बात करे तो महाभारत , स्कन्द पुराण ,विष्णु पुराण में इसका विवरण मिलता है।

  • बद्रीनाथ का नाम बरदीनाथ क्यों पड़ा ?

विभिन्न कालखंडो में बद्रीनाथ का नाम भी भिन्न भिन्न था , स्कंदपुराण में मुक्तिप्रदा , त्रेता युग में योग सिद्ध, द्वापर में मणिभद्र आश्रम कहा गया है कलयुग में इस धाम को बद्रिकाआश्रम या बद्रीनाथ कहा जाता है यहाँ बहुत अधिक मात्रा में बद्री (बेर) के पेड़ो के होने के कारण इस धाम का नाम बद्रीनाथ पड़ा है पुस्तक द हिमालयन गजेटियर में इसका उल्लेख मिला है , हलाकि अब यहाँ बेर के पेड़ बिलकुल भी दिखाई नहीं देते।

  • कब कर सकते हैं बद्रीनाथ के दर्शन

बद्रीनाथ धाम के कपाट साल में 6 महीने खुले रहते हैं बदरीनाथ के कपाट अप्रैल माह के अंत से लेकर नवबर शुरुवात तक सिमित समय के लिए खुले रहते हैं प्रत्येक साल लाखो कि संख्या में श्रदालु बद्रीनाथ के दर्शन करते हैं

  • तप्त कुंड का विशेष महत्व

बद्रीनाथ मंदिर के ठीक नीचे तप्त कुंड के नाम से एक गर्म पानी का एक कुंड है , सल्फर से युक्त इस पानी को औषदीय पानी माना जाता है तीर्थ यात्री मंदिर जाने से पहले इस कुंड में स्नान जरूर करते हैं।  मंदिर में पानी के दो तालाब भी हैं जिनको नारद कुंड और सूर्य कुंड कहा जाता है।

 

  • स्थायपात्य शैली का प्रयोग

बद्रीनाथ मंदिर अलकनंदा नदी से ५० मीटर ऊपर धरातल पर बना हुवा है इसका प्रवेश द्वार नदी कि तरफ है मंदिर की तीन संरचनाये हैं गर्व ग्रह, दर्शन मंडप , सभा मंडप मंदिर का मुख पत्थर से बना है धनुष आकर की खिड़किया , चौड़ी सीढ़ियों से मुख द्वार तक पहुंच जाता है जिसको सिंह द्वार भी कहा जाता है छत के मध्य में एक घंटी लटकी हुई है।

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