20 August 2026

UPES की दीवारों के पीछे बुना गया सुरक्षा का ‘अभेद्य कवच’

देहरादून: UPES यूनिवर्सिटी के कैंपस में शुक्रवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब अचानक आग लगने की सूचना फैली। हालांकि, यह कोई वास्तविक हादसा नहीं बल्कि भविष्य की किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए आयोजित एक “महा-मॉक ड्रिल” थी।
SDRF (State Disaster Response Force) और UPES की फायर सेफ्टी टीम ने संयुक्त रूप से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, जिसका मुख्य उद्देश्य स्टाफ, फैकल्टी और छात्रों को ‘अग्नि चक्रव्यूह’ से सुरक्षित बाहर निकलने का गुर सिखाना था।

🔥 धुआं, लपटें और ‘लाइव’ रेस्क्यू ऑपरेशन
यूनिवर्सिटी के फायर सेफ्टी ऑफिसर अंकुर और SDRF के जवानों ने मिलकर इस ड्रिल को बेहद संजीदा तरीके से पेश किया। कार्यक्रम में सिखाया गया कि:
  • आग लगने पर बिना घबराए इवेक्युएशन (निकासी) कैसे करें।
  • विभिन्न प्रकार के फायर एक्सटिंगुइशर का सही इस्तेमाल।
  • घायलों को मलबे या आग के बीच से निकालने की एडवांस तकनीक

🛡️ दिग्गजों की मौजूदगी में हुई तैयारी
इस महत्वपूर्ण सुरक्षा अभ्यास के दौरान यूनिवर्सिटी के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम की गंभीरता को देखते हुए मोहित मियान, विनय छेत्री, गोरे लाल, और अभिषेक सिंह ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया। साथ ही, सुरक्षा प्रोटोकॉल को समझने के लिए उपेंद्र पंवार, अनुराधा, नेहा, ज्योति, राजेंद्र सिंह, मोहित बिष्ट और विशाल समेत कई गणमान्य लोग ड्रिल का हिस्सा बने।

⚠️ ‘खतरनाक’ लापरवाही से बचाव ही एकमात्र रास्ता
अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि आग की छोटी सी चिंगारी पल भर में विकराल रूप ले सकती है। ऐसे में यह ड्रिल केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन बचाने का ‘सुरक्षा कवच’ है। छात्रों और स्टाफ को यह संदेश दिया गया कि तकनीक और जानकारी ही आपदा के समय सबसे बड़ा हथियार है।

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