31 August 2026

चाचा चौधरी बनाम डोरेमोन

चाचा चौधरी बनाम डोरेमोन

आजकल के छोटे बच्चे जो कार्टून देखने के शौकीन होते हैं उनको एक कैरेक्टर बहुत भाता है वो होता है डोरेमोन का क्युकी उसके पास बहुत अद्भुद शक्तिया होती है वो अपने गजेड के माधयम से जब चाहे उड़ सकता है , तैर सकता है कितनी भी बड़ी शक्ति से लड़ सकता है, समय को आवश्यकता के अनुसार आगे पीछे कर सकता है डोरेमोन वो सब कर सकता है जो बच्चो के बाल मन को छू लेने के लिए काफी होता है, बच्चे की कल्पनाओ में वह सुपर हीरो की तरह काम करता है। बाजार ने भी बच्चों की भावनाओ को पूरी तरह केस किया है और बाजार में डोरेमोन के खिलोने , डोरेमोन की छपाई वाले कपडे , बच्चों के बर्तन आदि -आदि सामान से बाजार सजा रहता है जिससे बच्चे पूरी तरह से आकर्षित होते रहते हैं।

परन्तु हमेशा से ऐसा नहीं था अगर दो – तीन दशक पुरानी बात की जाये तो डोरेमोन की जगह बच्चे चाचा चौधरी के बड़े मुरीद थ। चाचा चौधरी किसी कार्टून विडिओ का नायक नहीं था वो एक कॉमिक्स का नायक था चाचा चौधरी के पास हर समस्या से निपटने के लिए बहुत सारी चाल होती थी जिसको पड़कर बच्चे खूब आनंद लिया करते थे, चाचा चौधरी के पास लड़ने के लिए एक भीम सेनी लट्ठ होता था और उनके पास एक अनोखी चीज़ थी वो था साबू जो दूसरे ग्रह का प्राणी था और ताकत का भंडार था साथ में उनके पास एक कुत्ता था जिसका नाम रॉकेट था ये सब मिलाकर खूब धमाल करते थे और बच्चों के दिलो पर राज करते थ।

 

चाचा चौधरी के समय बाजार ने इनका कम उपयोग किया मात्र चाचा चौधरी के स्टिकर्स दिख जाते थे डोरेमोन और चाचा चौधरी में एक बड़ी विषमता है कि जहाँ डोरेमोन में जापान कि सस्कृति के दर्शन होते हैं वही चाचा चौधरी में शुद्ध रूप से भारतीयता के दर्शन होते हैं। चाचा चौधरी के बारे अक्सर लिखा जाता था की चाचा चौधरी का दीमक कंप्यूटर से भी तेज़ चलता है डोरेमोन की तकनीकी ट्रिक के साथ चाचा चौधरी की देसी चालो से मनोरंजन करना ना भूल।

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