चाचा चौधरी बनाम डोरेमोन

आजकल के छोटे बच्चे जो कार्टून देखने के शौकीन होते हैं उनको एक कैरेक्टर बहुत भाता है वो होता है डोरेमोन का क्युकी उसके पास बहुत अद्भुद शक्तिया होती है वो अपने गजेड के माधयम से जब चाहे उड़ सकता है , तैर सकता है कितनी भी बड़ी शक्ति से लड़ सकता है, समय को आवश्यकता के अनुसार आगे पीछे कर सकता है डोरेमोन वो सब कर सकता है जो बच्चो के बाल मन को छू लेने के लिए काफी होता है, बच्चे की कल्पनाओ में वह सुपर हीरो की तरह काम करता है। बाजार ने भी बच्चों की भावनाओ को पूरी तरह केस किया है और बाजार में डोरेमोन के खिलोने , डोरेमोन की छपाई वाले कपडे , बच्चों के बर्तन आदि -आदि सामान से बाजार सजा रहता है जिससे बच्चे पूरी तरह से आकर्षित होते रहते हैं।

परन्तु हमेशा से ऐसा नहीं था अगर दो – तीन दशक पुरानी बात की जाये तो डोरेमोन की जगह बच्चे चाचा चौधरी के बड़े मुरीद थ। चाचा चौधरी किसी कार्टून विडिओ का नायक नहीं था वो एक कॉमिक्स का नायक था चाचा चौधरी के पास हर समस्या से निपटने के लिए बहुत सारी चाल होती थी जिसको पड़कर बच्चे खूब आनंद लिया करते थे, चाचा चौधरी के पास लड़ने के लिए एक भीम सेनी लट्ठ होता था और उनके पास एक अनोखी चीज़ थी वो था साबू जो दूसरे ग्रह का प्राणी था और ताकत का भंडार था साथ में उनके पास एक कुत्ता था जिसका नाम रॉकेट था ये सब मिलाकर खूब धमाल करते थे और बच्चों के दिलो पर राज करते थ।

चाचा चौधरी के समय बाजार ने इनका कम उपयोग किया मात्र चाचा चौधरी के स्टिकर्स दिख जाते थे डोरेमोन और चाचा चौधरी में एक बड़ी विषमता है कि जहाँ डोरेमोन में जापान कि सस्कृति के दर्शन होते हैं वही चाचा चौधरी में शुद्ध रूप से भारतीयता के दर्शन होते हैं। चाचा चौधरी के बारे अक्सर लिखा जाता था की चाचा चौधरी का दीमक कंप्यूटर से भी तेज़ चलता है डोरेमोन की तकनीकी ट्रिक के साथ चाचा चौधरी की देसी चालो से मनोरंजन करना ना भूल।
