7 August 2026

पहाड़ों का अनमोल खजाना ‘किर्मोड़’ स्वाद भी, सेहत भी

उत्तराखंड के जंगलों का खट्टा-मीठा खज़ाना: किर्मोड़ बना सेहत और स्वाद का अनमोल फल

देहरादून/गढ़वाल: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पाए जाने वाला पारंपरिक जंगली फल “किर्मोड़” एक बार फिर चर्चा में है। गढ़वाल और कुमाऊं के जंगलों में उगने वाला यह फल, जिसे स्थानीय भाषा में किल्मोड़ा भी कहा जाता है, न सिर्फ अपने अनोखे खट्टे-मीठे स्वाद के लिए जाना जाता है बल्कि इसके औषधीय गुण भी इसे खास बनाते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, किर्मोड़ (Berberis asiatica) एक कांटेदार झाड़ी पर उगता है और इसके छोटे-छोटे लाल व बैंगनी रंग के फल गर्मियों के मौसम में पकते हैं। स्थानीय ग्रामीण और बच्चे इसे सीधे जंगल से तोड़कर खाने का आनंद लेते हैं।

आयुर्वेदिक दृष्टि से भी यह फल बेहद उपयोगी माना जाता है। इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन C पाया जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। इसके अलावा, यह पाचन तंत्र को मजबूत करने और शरीर को ऊर्जा देने में सहायक होता है।

स्थानीय स्तर पर किर्मोड़ का उपयोग जूस, चटनी और जैम बनाने में भी किया जाता है। पहाड़ी क्षेत्रों में यह न केवल एक स्वादिष्ट फल है बल्कि लोगों की आजीविका का भी एक साधन बनता जा रहा है। कई स्वयं सहायता समूह अब इसके उत्पाद तैयार कर बाजार में बेच रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस जंगली फल को व्यावसायिक स्तर पर बढ़ावा दिया जाए, तो यह उत्तराखंड के किसानों और स्थानीय समुदायों के लिए आय का एक नया स्रोत बन सकता है।

प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर उत्तराखंड में किर्मोड़ जैसे पारंपरिक फलों का संरक्षण और प्रचार न केवल स्थानीय संस्कृति को मजबूत करेगा बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी साबित होगा।

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