3 July 2026

चारधाम हेलीकॉप्टर बुकिंग का फर्जी नेटवर्क।

देहरादून / uk manthan 
चारधाम यात्रा और विशेषकर बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ का फायदा उठाकर देशव्यापी ठगी करने वाले एक शातिर अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का उत्तराखंड एसटीएफ (STF) ने भंडाफोड़ किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर गठित ‘एंटी हेली फ्रॉड सेल’ ने तकनीकी जांच और एक हफ्ते के कड़े ऑपरेशन के बाद बिहार के नालंदा जिले से गिरोह के दो मुख्य ऑपरेटरों को दबोच लिया है। 
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गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दीपक कुमार और विजित कुमार उर्फ मिकी के रूप में हुई है। जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने सोशल मीडिया, फर्जी वेबसाइटों और फर्जी बैंक खातों का जाल बुनकर देशभर के सैकड़ों भोले-भाले श्रद्धालुओं से लाखों रुपये की ठगी की है। 

💻 ठगी का तरीका: हूबहू सरकारी दिखने वाली फर्जी वेबसाइटें और VIP लालच
एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के अनुसार, यह गिरोह तकनीकी रूप से बेहद शातिर है और कई स्तरों पर काम करता था: [1]
  • क्लोन वेबसाइट्स और गूगल एड्स: ठगों ने IRCTC की आधिकारिक ‘हेली यात्रा’ वेबसाइट से मिलती-जुलती कई फर्जी और क्लोन वेबसाइट्स बना रखी थीं। जब कोई श्रद्धालु गूगल पर केदारनाथ हेलीकॉप्टर टिकट सर्च करता, तो ये फर्जी वेबसाइटें गूगल विज्ञापनों (Paid Ads) के जरिए सबसे ऊपर दिखाई देती थीं।
  • VIP दर्शन और तत्काल टिकट का झांसा: ये अपराधी श्रद्धालुओं को ‘तत्काल कन्फर्म टिकट’, ‘VIP दर्शन स्लॉट’ और ‘फ्री एडिशनल सर्विसेज’ का झांसा देकर अपने जाल में फंसाते थे।
  • व्हाट्सएप पर फर्जी टिकट: पैसे ट्रांसफर होते ही आरोपियों द्वारा श्रद्धालुओं के व्हाट्सएप और जीमेल पर हूबहू असली दिखने वाली फर्जी पीडीएफ (PDF) ई-टिकटें भेज दी जाती थीं। 
  • हेलीपैड पर खुलता था राज: श्रद्धालुओं को ठगी का अहसास तब होता था जब वे अपने परिवार के साथ उत्तराखंड के फाटा, सिरसी या गुप्तकाशी हेलीपैड पर पहुंचते थे। वहां जब सुरक्षाकर्मी उनके बारकोड और टिकट की जांच करते, तो टिकट फर्जी पाए जाते थे और यात्रियों को मायूस होकर लौटना पड़ता था। 

🔍 बिहार में एक हफ्ते तक चला उत्तराखंड STF का गुप्त ऑपरेशन
उत्तराखंड पुलिस की साइबर विंग को लगातार चारधाम हेली सेवा के नाम पर ऑनलाइन ठगी की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। तकनीकी विश्लेषण, बैंकों के मनी ट्रेल और मोबाइल डेटा को खंगालने पर इन अपराधियों का लोकेशन बिहार में मिला। 
एसटीएफ की एक विशेष टीम ने बिहार में करीब एक सप्ताह तक कैंप किया और स्थानीय इनपुट के आधार पर छापेमारी कर नालंदा से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इनके पास से कई मोबाइल फोन, फर्जी सिम कार्ड, एटीएम और बैंक पासबुक बरामद किए हैं। जांच में पता चला है कि ठगी की रकम को ‘म्यूल अकाउंट्स’ (दूसरों के नाम पर खुले फर्जी खातों) में ट्रांसफर कर तुरंत एटीएम के जरिए निकाल लिया जाता था। 

⚠️ पुलिस की अपील: केवल आधिकारिक पोर्टल से ही करें बुकिंग
उत्तराखंड पुलिस और एसटीएफ ने देश भर के श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत एजेंट या सोशल मीडिया विज्ञापनों के बहकावे में न आएं।

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