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DU का 100+ सालों का इतिहास -
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) का इतिहास 100 साल से भी अधिक पुराना और बेहद गौरवशाली है। न्यूज पोर्टल के लिए इसका ऐतिहासिक बैकग्राउंड (Historical Background) नीचे दिए गए पॉइंट्स के आधार पर एक स्पेशल आर्टिकल के रूप में तैयार किया जा सकता है: 
🏛️ दिल्ली विश्वविद्यालय का ऐतिहासिक सफर (1922-2026)
  • स्थापना (The Beginning): दिल्ली विश्वविद्यालय की स्थापना 1 मई 1922 को ‘दिल्ली विश्वविद्यालय अधिनियम’ (Delhi University Act) के तहत ब्रिटिश काल के दौरान हुई थी। उस समय भारत के वायसराय लॉर्ड रीडिंग इसके पहले कुलाधिपति (Chancellor) और सर हरि सिंह गौड़ इसके पहले कुलपति (Vice-Chancellor) बने थे।
  • सिर्फ 3 कॉलेज और 750 छात्र: जब DU की शुरुआत हुई, तब इसके पास अपना कोई बड़ा कैंपस नहीं था। यह सिर्फ 3 कॉलेजों—सेंट स्टीफंस कॉलेज (स्थापना 1881), हिंदू कॉलेज (स्थापना 1899) और रामजस कॉलेज (स्थापना 1917) को मिलाकर शुरू हुआ था। शुरुआत में इसमें केवल 750 छात्र और दो फैकल्टी (आर्ट्स और साइंस) थीं।
  • राजधानी बदलने का प्रभाव: साल 1911 में जब अंग्रेजों ने भारत की राजधानी को कलकत्ता (अब कोलकाता) से दिल्ली स्थानांतरित किया, तब दिल्ली में एक विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय बनाने की आवश्यकता महसूस हुई, जिसके बाद 10 साल के मंथन के बाद DU वजूद में आया।
  • वाइसरीगल लॉज (Viceregal Lodge) का ऐतिहासिक संबंध: नॉर्थ कैंपस में स्थित DU का मुख्य प्रशासनिक ब्लॉक (वाइसरीगल लॉज) इतिहास का गवाह है। इसी इमारत में कभी ब्रिटिश वायसराय रहते थे और यहीं पर शहीद भगत सिंह को पांच महीने तक बंदी बनाकर रखा गया था। बाद में 1933 में यह परिसर दिल्ली यूनिवर्सिटी को सौंप दिया गया।
  • साउथ कैंपस की शुरुआत: शुरुआत में विश्वविद्यालय केवल नॉर्थ कैंपस तक सीमित था, लेकिन छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुए साल 1973 में साउथ कैंपस की स्थापना की गई ताकि दिल्ली के अन्य हिस्सों के छात्रों को आसानी हो। 

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