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पांच बदरी सीरीज (4 – योगध्यान बदरी ) -

पांच बदरी सीरीज (4 – योगध्यान बदरी )

हम पांच बदरियो के बारे में पद रहे थे जिसमे हमने तीन बदरी के बारे में पड़ा आज हम चोयी बदरी के बारे में पड़ेगे जिसका नाम है योगध्यान बदरी जो जनपद चमोली के पांडुकेश्वर में है यह लगवग 2000 मीटर की उचाई पर है पौराणिक कथाओ के अनुसार गभर्व गृह में ध्यान (योग ध्यान ) की मुद्रा में भगवान की छवि है महाभारत के युद्ध में पांडव विजयी हुए थे पर अपने ही सगे-सम्बन्धियों की हत्या करने के कारण दुखी भी थे इसलिए आहात होकर हिमालय की तरफ आये और यही पर उन्होंने राजधानी हस्तिनापुर को राजा परीक्षित को सोप दिया और स्वर्ग के रास्ता तलाश करने से पहले तपस्या की थी योगध्यान बदरी मंदिर बद्रीनाथ मंदिर के समकक्ष मन जाता है।

योगध्यान बदरी पांडुकेश्वर में स्तिथ है जहा पांडवो के पिता राजा पाण्डु अपने निर्वाण से पहले तपस्या करते हुए यहाँ अपने जीवन के अंतिम दिनों को बिताया था इसलिए यहाँ का नाम पांडुकेश्वर पड़ा , राजा पाण्डु को यहाँ से मोक्ष की प्राप्ति के साथ पाडवो का जन्म और इसी स्थान से पांडव स्वर्गरोहणी चले गए थे भी यही होने के कारण यह स्थान धार्मिक और सस्कृति के लिहाज से बहुत खास है राजा पाण्डु ने भगवान विष्णु की कांस्य की एक मूर्ति जो ध्यान के मुद्रा में है स्थापित की जिसे योगध्यान बद्री कहा जाता है। यह मंदिर दर्शन हेतु साल भर खुला रहता है

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