26 September 2026

उत्तराखंड में गहराया “पावर क्राइसिस”

Uttrakhand में मानसून के दौरान कम बारिश होने के कारण नदियों का जल प्रवाह काफी घट गया है, जिससे राज्य की जलविद्युत परियोजनाओं में उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
‘ऊर्जा प्रदेश’ कहलाने वाले इस राज्य में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर इतना बढ़ गया है कि उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) को ‘फोर्स मेज्योर’ (Force Majeure) लागू करते हुए भारी कटौती का सहारा लेना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में 35 मिनट से लेकर 15 घंटे तक की बिजली कटौती (रोस्टरिंग) की जा रही है। इस संकट का सबसे बड़ा झटका कुमाऊं और गढ़वाल के भारी उद्योगों को लगा है, जिन्हें लगातार 15-15 घंटे के लंबे पावर कट का सामना करना पड़ रहा है, जिससे औद्योगिक उत्पादन ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। इसके विपरीत, ग्रामीण इलाकों में औसतन ढाई से तीन घंटे और शहरी क्षेत्रों जैसे हल्द्वानी में करीब 35 मिनट की कटौती की जा रही है। 
इस गहराते पावर क्राइसिस की मुख्य वजह जलविद्युत उत्पादन में आई भारी गिरावट है। पीक आवर्स के दौरान राज्य का उत्पादन पिछले वर्ष के 1,094 मेगावाट से घटकर महज 912 मेगावाट रह गया है। इसके साथ ही, तकनीकी खराबी के कारण टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट की दो महत्वपूर्ण इकाइयां (यूनिट 5 और 6) काफी समय से बंद चल रही हैं, जिससे पीक टाइम में करीब 100 मेगावाट की अतिरिक्त कमी हो गई है। शाम 4 बजे से सुबह 7 बजे के पीक आवर्स के दौरान राज्य में औसतन 350 मेगावाट बिजली की किल्लत बनी हुई है। बिजली की इस कमी को पूरा करने के लिए जब UPCL ने पावर एक्सचेंज का रुख किया, तो वहां कोयले की देशव्यापी कमी के कारण बिजली की दरें 10 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच चुकी हैं, लेकिन इतनी महंगी कीमत चुकाने के बाद भी जरूरत के मुताबिक बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है। [1, 2, 3]

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *