उत्तराखंड में ‘सूखी ठंड’ का सितम: अगले 5 दिन और बढ़ेगी कंपकंपी, न्यूनतम तापमान में बड़ी गिरावट के आसार!

देहरादून: उत्तराखंड में इस समय “सूखी ठंड” (Dry Cold) का प्रकोप जारी है, जिसने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लंबे समय से बारिश न होने और पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की कमी के कारण, रात और सुबह के समय कड़ाके की सर्दी महसूस हो रही है। मौसम विज्ञान केंद्र ने चेतावनी दी है कि अगले चार से पांच दिनों में राज्य के न्यूनतम तापमान (Minimum Temperature) में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे रातें और सर्द हो जाएंगी और कंपकंपी बढ़ेगी।
📉 मुख्य कारण और प्रभाव:
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बारिश की कमी: पिछले दो महीनों से राज्य में बारिश लगभग नदारद है, जिसके कारण मौसम शुष्क बना हुआ है। शुष्क मौसम में दिन और रात के तापमान में बड़ा अंतर देखा जाता है, जिसे आमतौर पर ‘सूखी ठंड’ कहा जाता है।
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पारे में गिरावट: मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, न्यूनतम तापमान में गिरावट से शीत लहर जैसे हालात बन सकते हैं। इससे मैदानी और पहाड़ी दोनों क्षेत्रों में रात का पारा तेजी से नीचे लुढ़केगा।
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पर्वतीय क्षेत्र: ऊंचाई वाले इलाकों, जैसे चमोली के नीति घाटी और बद्रीनाथ धाम में तापमान पहले ही माइनस 10 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच चुका है, जिससे नाले और झरने जमने लगे हैं।
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मैदानी क्षेत्र: मैदानी इलाकों (जैसे देहरादून, पंतनगर, हरिद्वार) में भी रात का तापमान 4 से 6 डिग्री सेल्सियस के बीच या इससे भी नीचे जा सकता है।

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दिन और रात के तापमान में बड़ा अंतर: वर्तमान में, कई क्षेत्रों में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से अधिक बना हुआ है (लगभग से ), जबकि रात का तापमान काफी नीचे जा रहा है। दिन और रात के तापमान में यह चार गुना से अधिक का अंतर लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है।
🌫️ कोहरे और पाले की चेतावनी:
आगामी दिनों में शुष्क मौसम और न्यूनतम तापमान में गिरावट के कारण निम्नलिखित स्थितियाँ बनेंगी:
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पाला (Frost): पर्वतीय क्षेत्रों के घाटियों और निचले इलाकों में सुबह के समय पाला जमने की संभावना बढ़ जाएगी। इससे सुबह के समय सड़कों पर फिसलन का खतरा बढ़ जाता है, जिससे वाहन चालकों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
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घना कोहरा (Dense Fog): मैदानी क्षेत्रों, खासकर हरिद्वार और उधम सिंह नगर जिलों में सुबह के समय घना कोहरा छा सकता है। कोहरे के कारण यातायात प्रभावित होने और दृश्यता (visibility) कम होने की आशंका है।
⚕️ स्वास्थ्य पर असर:
विशेषज्ञों ने सूखी ठंड को स्वास्थ्य के लिए अधिक हानिकारक बताया है, क्योंकि यह श्वसन संबंधी बीमारियाँ (Respiratory Issues) और फ्लू जैसी समस्याओं को बढ़ा सकती है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे सुबह और शाम की कड़ाके की ठंड से बचने के लिए पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें और आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलें।
अगले कुछ दिनों का संभावित मौसम:
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बारिश/बर्फबारी: फिलहाल, राज्य के अधिकांश हिस्सों में 16 दिसंबर के बाद भी मौसम शुष्क बना रहेगा। 17 दिसंबर के आसपास एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ आने की संभावना है, जिससे केवल उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जैसे ऊँचाई वाले क्षेत्रों में ही हल्की बारिश या मीटर से अधिक ऊंचाई पर बर्फबारी हो सकती है।
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ठंड का प्रकोप: तापमान में गिरावट का सिलसिला दिसंबर तक जारी रह सकता है, जिसके बाद मैदानी इलाकों में शीत लहर और बढ़ सकती है।
