दूसरा क्रिकेट वर्ल्ड कप (1979) की कहानी

1979 का क्रिकेट वर्ल्ड कप इंग्लैंड में खेला गया था और यह वर्ल्ड कप का दूसरा संस्करण था। इस टूर्नामेंट में 8 टीमों ने भाग लिया था, जिनमें से 6 टीमें टेस्ट खेलने वाली थीं और दो टीमें (श्रीलंका और कनाडा) ने क्वालिफायर खेलकर जगह बनाई थी। विंडीज का दबदबा: यह टूर्नामेंट भी वेस्टइंडीज के दबदबे के लिए जाना जाता है। क्लाइव लॉयड की कप्तानी में वेस्टइंडीज की टीम पहले से ही काफी मजबूत थी और उन्होंने अपने खिताब को सफलतापूर्वक डिफेंड किया। फाइनल मुकाबला: फाइनल में वेस्टइंडीज का सामना मेजबान इंग्लैंड से हुआ। वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 99 रन पर 4 विकेट खो दिए थे, लेकिन इसके बाद विवियन रिचर्ड्स और कोलीस किंग ने शानदार पार्टनरशिप की। विवियन रिचर्ड्स ने 138 रन की नाबाद पारी खेली और कोलीस किंग ने 86 रनों की तूफानी पारी खेली। उनकी बदौलत वेस्टइंडीज ने 286 रन का एक बड़ा स्कोर खड़ा किया।इंग्लैंड की हार: जवाब में, इंग्लैंड की शुरुआत अच्छी रही, लेकिन वेस्टइंडीज के घातक पेस अटैक के सामने उनकी पारी बिखर गई। जोएल गार्नर ने 5 विकेट लेकर इंग्लैंड की कमर तोड़ दी, और पूरी टीम 194 रनों पर ऑलआउट हो गई। इस तरह वेस्टइंडीज ने 92 रनों से मैच जीतकर लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया।

टूर्नामेंट में भारत का प्रदर्शन
1979 का वर्ल्ड कप भारत के लिए बहुत ही निराशाजनक रहा। भारतीय टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक बिल्कुल नहीं था और वह ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई थी। तीनों मैच में हार: भारत ने इस टूर्नामेंट में कुल 3 मैच खेले और वह सभी में हार गई। भारत की टीम ने वेस्टइंडीज, न्यूजीलैंड और पहली बार खेलने वाली श्रीलंका से भी मैच हारा था। श्रीलंका से हार: भारत की सबसे बड़ी निराशाजनक हार श्रीलंका के खिलाफ थी। श्रीलंका उस समय तक टेस्ट खेलने वाली टीम नहीं थी, फिर भी उन्होंने भारत को 47 रनों से हरा दिया था। इस हार ने भारतीय क्रिकेट के लिए बहुत से सवाल खड़े किए थे।
संक्षेप में, 1979 का वर्ल्ड कप वेस्टइंडीज की शक्ति और दबदबे का प्रतीक था, जबकि भारतीय टीम के लिए यह एक कड़वी हार का अनुभव था, जिसने आने वाले समय में बड़े बदलावों की नींव रखी।
