द्रितीय केदार मदमहेश्वर

उत्तरखंड मंथन पांच केदार के बारे में अपने पाठको को रु-ब-रु करवा रहा है इसी क्रम में आज हम द्रितीय केदार यानी मदमहेश्वर के बारे में अपने पाठको को जानकारी देंगे। यह मान्यता है की महाभारत की काल में यह मंदिर पांडवो के दवारा बनाया गया था मदमहेश्वर में भगवान शिव के बैल स्वरुप की नाभि की पूजा की जाती है।

यह मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में है हिन्दू मयताओ के अनुसार इस मंदिर में एक समय शिवजी और माता पार्वती ने एक रात इस मंदिर में बितायी थी , इस मंदिर की पूजा दक्षिण भारत के लिंगायत ब्रामण करते हैं यह मंदिर सर्दियों में नवंबर से अप्रैल तक बंद रहता है। मदमहेश्वर मदिर आने के लिए पैदल मार्ग से गुजरना पड़ता है।
