
हाल ही में मेरठ टोल पर एक घटना हुई, जिसने हम सभी को दुखी किया, और वह इसलिए क्योंकि यह घटना कहीं न कहीं हम से जुड़ी थी। इस घटना में कपिल, जो कि सेना का एक जवान है, टोल से गुजर रहा था, जिसमें उसकी किसी बात पर टोल कर्मचारियों से तू-तू मैं-मैं हो गई। विवाद इतना बढ़ गया कि कम से कम 8 से 10 टोल कर्मचारियों ने लाठी-डंडों, लात-घूसों से कपिल की इतनी पिटाई कर दी, जैसे कपिल ने कोई बड़ा अपराध किया हो। यह घटना बहुत निंदनीय थी। इसके बाद जब विवाद बढ़ा, और इसकी वीडियो सोशल मीडिया में आने के बाद चौतरफा विरोध होने लगा, जिसके फलस्वरूप टोल पर ₹20 लाख का जुर्माना लगाने के साथ ही उसका लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया।

विवेचना
इस टोल का लाइसेंस रद्द होना बहुत जरूरी था, क्योंकि इसके बाद इस और अन्य टोल कर्मियों और स्वामियों को एक सबक मिलेगा कि टोल पर इस तरह का अनुचित व्यवहार नहीं करना है, क्योंकि टोल पर इस तरह की घटनाएँ आम हैं, जिसका सामना हम सभी ने किया है। ये टोल कर्मी किसी के साथ भी अनुचित व्यवहार करने से नहीं चूकते और अगर कोई विवाद हो गया तो मारपीट करने में भी पीछे नहीं रहते। यूँ कहा जा सकता है कि टोल पर इनके द्वारा खुली गुंडागर्दी होती है। मुझे नहीं लगता है कि इनकी शिकायत करने पर भी इनके ऊपर कोई दंडात्मक कार्रवाई होती है, अगर होती तो ये सुधरे हुए रहते और मेरठ वाली घटना हमारे सामने नहीं आती। अक्सर लोग जरूरी कामों से या परिवार के साथ घूमने जाते हुए टोल को पार करते हैं और दोनों ही परिस्थितियों में कोई भी व्यक्ति इनसे उलझना नहीं चाहता और इनको यह लगता है कि ये सब डरे हुए हैं और ये अपनी मनमानी, नियम के विपरीत कार्य और अपना अनैतिक व्यवहार करते हैं। मेरठ की घटना के बाद उम्मीद कर सकते हैं कि इनकी कार्यशैली में अंतर पड़ेगा,
एक आम आदमी बस उम्मीद ही कर सकता है।….
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