1996 वर्ल्ड कप: जब श्रीलंका ने लिखा एशिया की सबसे बड़ी क्रिकेट कहानी
नई दिल्ली, मार्च 1996।
क्रिकेट इतिहास का एक ऐसा अध्याय, जिसने खेल की परिभाषा ही बदल दी — 1996 का वर्ल्ड कप। भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका की संयुक्त मेज़बानी में हुआ यह टूर्नामेंट न केवल रोमांच से भरा रहा, बल्कि इसमें जन्म हुआ एक नए विश्व चैंपियन का — श्रीलंका।
श्रीलंका की ऐतिहासिक जीत
लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में श्रीलंका ने ऑस्ट्रेलिया को 7 विकेट से हराकर इतिहास रच दिया।
पहली बार किसी छोटे द्वीप देश ने क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतकर दुनिया को चौंका दिया।
ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 241 रन बनाए, जिसके जवाब में श्रीलंका ने 46.2 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया।
टीम के नायक बने अरविंदा डी सिल्वा, जिन्होंने नाबाद 107 रन बनाए और तीन विकेट झटके।
उन्हें फाइनल का मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया।
जयसूर्या का तूफ़ान और नई रणनीति
टूर्नामेंट की सबसे बड़ी कहानी थी श्रीलंका की नई बल्लेबाज़ी रणनीति।
ओपनर सनथ जयसूर्या और रोमेश कलुविथरना ने शुरुआती ओवर्स में आक्रामक बल्लेबाज़ी से विरोधी टीमों को हिला कर रख दिया।
पावरप्ले में तेज़ रन बनाने की यह रणनीति आगे चलकर आधुनिक क्रिकेट की पहचान बन गई।
जयसूर्या को उनके पूरे टूर्नामेंट के प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया।
🇮🇳 भारत की उम्मीदें और कोलकाता का विवाद
भारतीय टीम का प्रदर्शन भी प्रभावशाली रहा।
सचिन तेंदुलकर ने 523 रन बनाकर टूर्नामेंट में सबसे अधिक रन बनाए।
हालांकि सेमीफ़ाइनल में भारत को श्रीलंका के हाथों हार का सामना करना पड़ा।
कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेले गए उस मैच में जब भारत 120 पर 8 विकेट खो चुका था,
भीड़ ने हंगामा कर दिया — बोतलें फेंकीं और मैच बाधित हो गया।
अंपायरों ने अंततः श्रीलंका को विजेता घोषित कर दिया।
🌏 नया चैंपियन, नई सोच
1996 का वर्ल्ड कप सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं था, बल्कि क्रिकेट में बदलाव का प्रतीक बन गया।
श्रीलंका ने दिखाया कि रणनीति, आत्मविश्वास और टीमवर्क से कोई भी टीम दुनिया की सबसे बड़ी टीमों को हरा सकती है।
कप्तान अर्जुना रणतुंगा की अगुवाई में यह जीत श्रीलंका क्रिकेट के स्वर्णिम युग की शुरुआत बनी।


