तेजी से बड़ रही है मोहित के भजनो की मांग
Demand for Mohit’s bhajans has increased rapidly.
आज हम एक ऐसे युवा की बात कर रहे हैं जिनके कंठ में मानो सरस्वती विराजमान हो जब वो मंच पर भगवान की स्तुति करते हुए गाते है तो एक अलग ही माहौल बन जाता ही और दर्शक नाचने पर मजबूर हो जाते है , उस युवा का नाम है मोहित सती

मोहित की बात करे तो मोहिर मूल रूप से पोखरी (जनपद चमोली) के निवासी है, जिनका अध्ययन काल से और वर्तमान तक चमोली जनपद के ही एक नगर गौचर में निवास कर रहे हैं मोहित ने बाल्यकाल से गायन आरम्भ कर दिया था महज 8 – 9 वर्ष की उम्र से ही वो उत्तराखंड की सस्कृति और सांस्कृतिक कार्यकर्मो की तरफ झुक गए थे , बेहद सरल स्वभाव व मिर्दुभासी मोहित इंजीनियरिंग पृष्ट्भूमि से हैं पर उन्होंने अपनी अलग ही राह चुनी है उन्होंने सस्कृति की सेवा करने के राह चुनी है मोहित की विडिओ अल्बम राजुली नंदा श्रोताओ को काफी पसंद आयी है मोहित ने बातो ही बातो में उत्तराखंड मंथन को बताया है कि वो रोमांटिक व शृंगार रस को गाने में भी सक्षम हैं परतु वो शुरुवाती पहचान भक्ति गायक के रूप में बनाना चाहते हैं।

उत्तराखंड के जाने माने गायक मंगलेश डंगवाल भी मोहित सती के मुरीद हैं और उनको आग बढ़ाने को प्रेरित करते हैं कई मंचो पर मोहित ने मंगलेश डंगवाल के साथ मंच भी साझा किया है , मोहित ने छोटी उम्र में ही गायन कि जो उपलब्धिया हासिल की हैं उस आधार पर आज उत्तराखंड का सायद ही कोई जनपद हो जहा कार्यक्रमों हेतु उनकी मांग नहीं होती है
जब मोहित किसी गांव में जाते हैं तो अपने भजनो और अपने व्यहार कुशलता से गर्मिणो का दिल इस तरह से जीत लेते हैं कि उनकी विदाई के समय सभी ग्रामवासी भावुक हो जाते हैं मोहित का मत है कि आज कि युवा पीढ़ी को पश्चमी सभयता के स्थान पर उत्तराखंड की संस्कृति का अनुकरण करना चाहिए।
उत्तराखंड मंथन मोहित सती को निकट भविष्य के लिए शुभकामनाये देता है
