देवदूत हैं NDRF और SDRF

कहा जाता है कि आपदाए कभी कह के नहीं आती हैं यह जब भी आती है आफतो का पिटारा खुल जाता है, सरकार हो जनमानस हो या मवेशी हो सब के सामने चुनोतियो का पहाड़ खड़ा हो जाता है, जब शासन – प्रशासन के हाथ पाँव फूल जाते हैं आम नागरिक अपनी जिंदगी बचाने के लिए संघर्ष करता रहता है तब उन कि मदद करने को देवदूत बन कर आते हैं SDRF और NDRF के जवान।
बाड़, भूकंप, भूस्खलन, या कोई भी आपदा हो SDRF और NDRF का लक्ष्य होता है हर किसी कि जान कि हिफाजत करना, सच में वो किसी देवदूत से कम नहीं हैं।
SDRF और NDRF के विषय में जानते हैं :-

NDRF ( National Disaster Response Force ) राष्टीय आपदा मोचन मंच जिसकी स्थापना 2006 को आपदाओ से निपटने के लिए किया गया , इसकी स्थापना भारत सरकार के द्वारा किया गया जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। NDRF भारत कि 16 बटालियनों से मिलकर बना है। यह फ़ोर्स गृह मंत्रालय के अधीन आता है।

SDRF -: ( state Disaster Response Force ) राज्य आपदा प्रतिवादन बल , जिस तरह NDRF एक केंद्रीय संस्था है केंद के पास आपदाओं से निपटने के लिए NDRF होती है उसी तरह से राज्यों के पास आपदाओं से निपटने और परस्थिति को सामान्य बनाने के लिए SDRF होती है , यह राज्य सरकार का विभाग होता है। उत्तराखंड में पिछले 10 सालो से SDRF अस्तित्व में है। और यह सभी जिलों में तैनात है , बीते दस सालो में SDRF उत्तराखंड ने अनेको बार जान माल के बड़े नुकसान से उत्तराखंड को बचाया है। उत्तराखंड मंथन इन दोनों फ़ोर्स की भूरी भूरी प्रसंशा करता है।
