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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी का देहरादून में निधन, आज राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार -
देहरादून:
उत्तराखंड की राजनीति और देश की सैन्य विरासत का एक बड़ा स्तंभ ढह गया है. उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी का मंगलवार (19 मई 2026) को 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया. वे लंबे समय से उम्र संबंधी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे और देहरादून के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. अस्पताल में करीब 11:00 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली, जिसकी पुष्टि उनकी पुत्री और उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण ने की.
3 दिन का राजकीय शोक और सार्वजनिक अवकाश घोषित
पूर्व मुख्यमंत्री के सम्मान में उत्तराखंड सरकार ने 19 मई से 21 मई तक तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की है. इस दौरान सभी सरकारी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और सभी आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं. सरकार द्वारा बुधवार (20 मई) को सार्वजनिक अवकाश भी घोषित किया गया, जिसके तहत पूरे राज्य में राजकीय सम्मान के साथ हरिद्वार में उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा है.
सैन्य वर्दी से लेकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का सफर
राजनीति में आने से पहले बीसी खंडूरी ने भारतीय सेना के इंजीनियरिंग कोर में 3 दशकों से अधिक समय तक अपनी सेवाएं दीं और मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए. उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से भी सम्मानित किया गया था. आम जनता और राजनीतिक हलकों में वे ‘जनरल साहब’ के नाम से बेहद लोकप्रिय थे.
  • केंद्रीय राजनीति में योगदान: वे गढ़वाल लोकसभा सीट से 5 बार सांसद चुने गए. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वे केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री रहे. भारत के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘गोल्डन क्वाड्रिलैटरल’ (स्वर्ण चतुर्भुज) के क्रियान्वयन का श्रेय उन्हीं को जाता है.
  • उत्तराखंड के दो बार मुख्यमंत्री: खंडूरी जी दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने (पहला कार्यकाल: 2007 से 2009 और दूसरा कार्यकाल: 2011 से 2012). वे राज्य में बीजेपी के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री थे. अपने कार्यकाल में उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त लोकायुक्त कानून लाने और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे ऐतिहासिक फैसले लिए थे. राजनीति में उनकी साफ-सुथरी छवि के कारण ‘खंडूरी है जरूरी’ का नारा उस दौर में काफी गूंजा था.

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