मूंगफली (Peanut), जिसे अक्सर “गरीबों का बादाम” भी कहा जाता है, एक बहुत ही पौष्टिक तिलहनी फसल है, जो फलियों की श्रेणी (legume family) में आती है। यह प्रोटीन, स्वस्थ वसा और फाइबर का एक उत्कृष्ट स्रोत है और दुनिया भर में इसका सेवन किया जाता है।

पोषण और स्वास्थ्य लाभ
मूंगफली कई प्रकार के पोषक तत्वों से भरपूर होती है।

- पोषक तत्व: इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, हेल्दी फैट (मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड), फाइबर, विटामिन-ई, बी-विटामिन, और कैल्शियम, आयरन, पोटेशियम, मैग्नीशियम जैसे खनिज पाए जाते हैं।
- हृदय स्वास्थ्य: मूंगफली खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने में मदद करती है, जिससे हृदय रोग का खतरा कम होता है।
- वजन प्रबंधन: इसमें मौजूद प्रोटीन और फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखते हैं, जिससे भूख कंट्रोल होती है और वजन घटाने में मदद मिलती है।
- ब्लड शुगर कंट्रोल: फाइबर की उपस्थिति के कारण, यह रक्त शर्करा को धीरे-धीरे बढ़ाती है, जो मधुमेह (diabetes) वाले व्यक्तियों के लिए फायदेमंद है。
- अन्य लाभ: यह मांसपेशियों को मजबूत बनाने, गैस और एसिडिटी की समस्या दूर करने (भिगोकर खाने पर), और इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स के कारण कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम को कम करने में भी सहायक है।
उपयोग
मूंगफली का उपयोग विभिन्न तरीकों से किया जाता है:
- स्नैक: इसे भूनकर, उबालकर या कच्चा सीधे खाया जाता है।
- तेल: यह तेल का एक प्रमुख स्रोत है, जिसका उपयोग खाना पकाने में किया जाता है।
- अन्य उत्पाद: पीनट बटर, मिठाइयाँ, और नमकीन बनाने में भी इसका व्यापक रूप से उपयोग होता है।
खेती
- फसल का प्रकार: मूंगफली एक वार्षिक जड़ी-बूटी वाला पौधा है, जिसकी फलियाँ जमीन के अंदर पकती हैं।
- मुख्य उत्पादक: भारत में गुजरात मूंगफली का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है, इसके बाद आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु का स्थान आता है।
- फसल की अवधि: यह रोपण के लगभग 140 से 150 दिनों के बाद कटाई के लिए तैयार हो जाती है।
- भंडारण: लंबी अवधि के भंडारण के लिए, मूंगफली को बिना छीले फली के रूप में सुखाकर रखना बेहतर होता है, ताकि फफूंदी (aflatoxin) के संक्रमण से बचा जा सके।
मूंगफली के सेवन से कई लाभ हैं, लेकिन किडनी स्टोन या यूरिक एसिड के मरीजों को इससे परहेज करना चाहिए।
