उत्तराखंड का शांत और स्वच्छ वातावरण अब तेजी से धुंध और प्रदूषण की चपेट में आ रहा है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, देहरादून और ऋषिकेश जैसे शहरों की हवा अब दिल्ली-NCR जैसी ‘जहरीली’ होने लगी है। दिसंबर 2025 की मौजूदा स्थिति ने पर्यावरणविदों और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है।
यहाँ इस विषय पर विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:

दिल्ली की राह पर उत्तराखंड: प्रमुख तथ्य
दिसंबर 2025 के मध्य में देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:
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खतरनाक स्तर पर AQI: देहरादून के कई इलाकों में AQI 290 से 350 के बीच दर्ज किया गया है, जिसे ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में माना जाता है। दिवाली के दौरान यह स्तर 460 तक भी पहुँच गया था।
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ऋषिकेश की हालत: चारधाम यात्रा के प्रवेश द्वार ऋषिकेश में भी वाहनों के भारी दबाव के कारण हवा की गुणवत्ता तेजी से गिर रही है।
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हवा में प्रदूषक: मुख्य रूप से PM 2.5 और PM 10 का स्तर सामान्य से कई गुना अधिक पाया गया है, जो फेफड़ों और श्वसन तंत्र के लिए अत्यंत हानिकारक है।
प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण
हिमालयी राज्य में प्रदूषण के बढ़ते ग्राफ के पीछे कई बड़े कारण हैं:
स्वास्थ्य और जीवन पर असर
खराब होती हवा का असर अब अस्पतालों में भी दिखने लगा है:
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बीमारियों में वृद्धि: साइनस, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और आंखों में जलन के मरीजों की संख्या में 20-30% की वृद्धि दर्ज की गई है।
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कोहरे का कहर: वायु प्रदूषण और ठंड के कारण घना कोहरा छा रहा है, जिससे ट्रेनों और उड़ानों के संचालन पर भी गहरा असर पड़ रहा है।
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पर्यटन पर खतरा: स्वच्छ हवा के लिए पहाड़ों का रुख करने वाले पर्यटक अब इन शहरों से बचने लगे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
सरकार के कदम और भविष्य की चुनौती
उत्तराखंड सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने NCAP (National Clean Air Programme) के तहत करीब 94 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है। इसके तहत:
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सड़कों की मैकेनाइज्ड सफाई और धूल नियंत्रण के उपाय किए जा रहे हैं।
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15 साल से पुराने व्यावसायिक वाहनों को हटाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
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प्रदूषण जांच केंद्रों (PUC) की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

