तीनधारा आपका भोजन पड़ाव (दिलचस्प लेख)

तीनधारा एक ऐसी जगह है जो अपने पर्यटन और धार्मिक महत्व से ज्यादा जाना जाता है अपने भोजन पड़ाव के लिए जो की कई स्थानीय लोगो को रोजगार भी दिए हुए है अगर कहु की तीनधारा अपने आप में एक छोटी सी भोजन इंडस्ट्री है तो शायद कई लोग मुझसे सहमत होंगे

अगर आप उत्तराखंड के 2 धाम श्री केदारनाथ – श्री बद्रीनाथ की यात्रा को जा रहे हैं तो ऋषिकेश से लगभग 60 किमी की दुरी पर आपको एक बहुत ही छोटा स्टेशन मिलेगा जहा पर आपको मुख्यरूप से तीन प्राकृतिक श्रोतो से प्राकृतिक पानी निकलता हुवा दिखेगा ये पानी शीतल और साफ़ होता है अन्य भी कई छोटे श्रोतो आपको देखने को मिलते हैं यहाँ पर आपको आवासीय घर नहीं मिलेंगे , होटल और ढाबे यहाँ पर हज़ारो यात्री खाना – पीना और चाय पीते हुए नज़र आएंगे , आपका पेट चाहे पूरा भरा हो पर तीनधारा आते ही आप अपनी गाडी का ब्रेक खुद लग जायेगा यहाँ पर लोग कुछ ना कुछ खाते हुए नज़र आएंगे इस पुरे बाजार में भटट्टियो पर बनता खाना , एक साथ आपको कई ढाबो का स्टाफ अपने ढाबे में आने के लिए आमंत्रित करते हुए नज़र आएंगे। खाने के अलावा आपको खीरे, जूस , पहाड़ी ककड़ी और शिलोटे में पिसा हुवा नमक , के साथ ही पहाड़ी दालों के बेचने वालो के छोटे छोटे आउटलेट मिल जायेगे।

कैसे हुई शुरुवात
तीनधारा में शुरुवात में एक या दो बहुत छोटे झोपड़ीनुमा ढाबे हुवा करते थे जहाँ पर ट्रक रुका करते थे क्युकी यहाँ पर पर्याप्त मात्रा में पानी था तो ट्रक के ड्राइवर – और कलेण्डर का नहाना धोना ट्रको की सफाई के साथ खाना पीना हो जाता था पर धीरे धीरे सब यात्रियों और गाडी – ट्रक वालो लो ये जगह पसंद आने लग गयी समय गुजरता रहा और झोपड़ियों कई जगह पके ढाबे बनाने लग गए जमीन की कमी होने पर चटानो पर बिम खड़ा करके ढाबो का एक छोटा साम्राज्य खड़ा हो गया अब यह यात्रियों कई भोजन करने की पहली पसंद बन गयी

एक वजह यह भी
तीनधारा का भोजन पड़ाव बनने की एक वजह यह भी है कि जब ऋषिकेश/देहरादून से आम तोर पर 7 बजे चलते हैं तो 60 किमी दूर तीनधारा में नो से दस बजे तक पहुंचते हैं जो कि नास्ते का समय होता है और तीनधारा में नास्ते की समुचित व्यवस्ता है साथ ही अगर आप बद्रीनाथ या जोशीमठ से ऋषिकेश / देहरादून / हरिद्वार की तरफ आते हैं तो तीनधारा लगभग 210 – 220 किमी की दुरी पर पड़ता है 7 बजे से यात्रा प्रारम्भ करने से आप तीनधारा पर दिन का भोजन करने के समय (लंच टाइम ) पर पहुंचते हैं तो इन कारण भी यहाँ होटल / ढाबा व्यवसाय के लिए बहुत उचित है।
लेख निजी अनुभव के आधार पर उपेंद्र पंवार
(फोटो गूगल)
