क्रिकेट में राजनीति

आज के युग में देखने को मिल रहा है की राजनीति हर जगह होती है इससे क्रिकेट भी अछूता नहीं रहा क्रिकेट और राजनीती का चोली दामन सा साथ है आओ इस चर्चा को आगे बढ़ाते हैं। राजनीती की बाद करे तो सबसे पहले बात करते हैं क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर की सचिन ने क्रिकेट की तरह राजनीती में अहम् पारी खेली है।
वो भारत की संसद में राज्य सभा के सांसद रहे है पर कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्होंने फिर राजनीती की तरफ फिर मुद कर नहीं देखा। पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने टीएमसी की सदस्य्ता ग्रहण की है बंगाल में, बाए हाथ के भारत के सलामी बल्लेबाज़ गौतम गंभीर जो की दिल्ली से लोक सभा के सांसद हैं , भूतपूर्व क्रिकेटर में नवाब पटती ने भी २ बार चुनाव लड़ा पर सफलता हासिल नहीं हो सक।

कॉमेडी में अपनी विशेष छवि बनाने वाले नवजोत सिंह सिद्धू भी लम्बे समय तक अमृतशर के सांसद की भूमिका निभाई भारत के २ विश्व कप में कप्तानी करने वाले मोहमद अज़रुद्दीन ने दो बार मुरादाबाद की सांसद की सीट कब्जाई है। मोहमद कैफ को समाजवादी पार्टी ने फूलपुर से विधायक के टिकट दिया पर वो जीत नहीं पाए। कीर्ति आज़ाद दरभंगा से अपनी राजनीती की शरुवात कर चुके हैं। भारत के पुराने आलराउंडर दिल्ली में बीजेपी को ज्वाइन की है हालांकि वो कभी चुनाव नहीं लड़े विनोद काम्बली महारास्ट्र से लोक जनता दल से विधायक के चुनाव लड़े पर हार के सामना करना पड़ा ऐसा नहीं है कि केवल भारत के ही क्रिकेट में ही राजनीती है बल्कि पडोसी मुल्क श्रीलंका के कप्तान रहे अर्जुन रणतुंगा श्रीलंका सरकार में पर्यटन मंत्री रह चुके हैं और सबसे बड़ा उदाहरण पाकिस्तान का यहाँ के तेज़ गेंदबाज़ इमरान खान ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का पद ग्रहण कर चुके हैं।


