उत्तराखंड का गाँधी

जब किसी को भी ” गाँधी ” यानी महात्मा गाँधी के नाम सम्बोधित किया जाता है तो इस बात का अंदाज़ा लगाना बहुत ही आसान हो जाता है की उस व्यकिती की सामाजिक महत्व क्या है और समाज उनका कितना सम्मान करता है, ऐसे ही हमारे उत्तराखंड की महान विभूति जिनको की उत्तराखंड का गाँधी नाम से सम्बोधित किया जाता है अगर आप सोच रहे हैं की हम इंद्रमणि बडोनी की बात कर रहे हैं तो आप बिलकुल सही सोच रहे हैं हलाकि इंद्रमणि बडोनी का स्वर्गवास 1999 में हो चूका है पर उनकी विचारधारा और उत्तराखंड के लिए उनके संघर्ष को आज भी बड़े सम्मान से याद किया जाता है। उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन ही समर्पित कर दिया था।

टिहरी जिले क के अखोडी गांव में श्री सुरेश चंद्र बडोनी के घर दिसम्बर 1925 को इंद्रमणि बडोनी का जन्म हुआ इन्होने देहरादून से स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की श्री बडोनी अपने आप में बड़े ही क्रांतिकारी व्यक्ति थी, इंद्रमणि बडोनी उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने के प्रबल समर्थक थे साथ ही वो चाहते थे की उत्तराखंड की राजधानी उत्तराखंड के केंद्र यानी गैरसेण में बने , उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने हेतु उन्होंने मंसूरी में 1979 में उत्तराखंड क्रांति दल की स्थापना की , उन्होंने उत्तराखंड क्रांति दल के बनने के बाद 100 से ज्यादा दिनों की पैदल यात्रा भी की जिसका उदेश्य जनमानस को उत्तराखंड के प्रति आकर्षित करना था , उत्तरखंड में इंद्रमणि बडोनी का कद बहुत ुचा था उन्होंने देवप्रयाग विधानसभा से विधायक का चुनाव भी लड़ा और तीन बार वो यहाँ से विधायक भी रहे , साथ ही सांसद के चुनाव के लिए भी वो मैदान में उतरे पर यहाँ उनको सफलता नहीं मिल पायी , उत्तराखंड के गांधी श्री इंद्रमणि बडोनी जी को उत्तराखण्डं मंथन की तरफ से सदर नमन
