उत्तराखंड में बॉटल ब्रश की खेती से किसानों को दोहरा लाभ, सगंध पौध केंद्र सेलाकुई का शोध

देहरादून, उत्तराखंड – उत्तराखंड के किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। सगंध पौध केंद्र (CAP) सेलाकुई, देहरादून, बॉटल ब्रश (Callistemon) की खेती पर गहन शोध कर रहा है, जिसके सफल परिणाम आने पर किसानों को दोहरा आर्थिक लाभ मिल सकता है। यह पहल न केवल कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देगी, बल्कि किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि करेगी।
क्या है बॉटल ब्रश और क्यों है यह महत्वपूर्ण?
बॉटल ब्रश एक सुंदर सजावटी पौधा है, जो अपनी आकर्षक, बोतल के ब्रश जैसी फूलों के लिए जाना जाता है। आमतौर पर इसे पार्कों, बगीचों और सड़क के किनारे लगाया जाता है। हालांकि, सगंध पौध केंद्र सेलाकुई द्वारा किए जा रहे शोध से पता चला है कि इस पौधे में औषधीय और सुगंधित गुण भी प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं।

दोहरा फायदा कैसे?
CAP सेलाकुई के वैज्ञानिकों के अनुसार, बॉटल ब्रश की खेती से किसानों को मुख्य रूप से दो तरह से फायदा होगा:
- सजावटी फूलों से आय: बॉटल ब्रश के फूल कट फ्लावर उद्योग में अत्यधिक मांग में हैं। इनकी लंबे समय तक ताजगी और आकर्षक रूप इन्हें फूलों की दुकानों और इवेंट डेकोरेशन के लिए एक उत्कृष्ट विकल्प बनाता है। किसान इन फूलों को बेचकर अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं।
- आवश्यक तेल उत्पादन: शोध से पता चला है कि बॉटल ब्रश की पत्तियों और फूलों से उच्च गुणवत्ता वाला आवश्यक तेल (Essential Oil) निकाला जा सकता है। इस तेल में औषधीय गुण होते हैं और इसका उपयोग सुगंधित उत्पादों, सौंदर्य प्रसाधनों और पारंपरिक चिकित्सा में किया जा सकता है। आवश्यक तेलों की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है, जिससे किसानों को अतिरिक्त और महत्वपूर्ण आय का स्रोत प्राप्त होगा।
सगंध पौध केंद्र सेलाकुई का शोध:
सगंध पौध केंद्र सेलाकुई, जो सुगंधित और औषधीय पौधों पर अनुसंधान के लिए जाना जाता है, बॉटल ब्रश की विभिन्न प्रजातियों पर शोध कर रहा है। शोध का मुख्य उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि उत्तराखंड की जलवायु और मिट्टी में कौन सी प्रजातियाँ सबसे अच्छी उपज देती हैं और उनमें आवश्यक तेल की मात्रा सबसे अधिक होती है। इसके अलावा, तेल निकालने की सर्वोत्तम विधियों और विभिन्न उत्पादों में इसके संभावित उपयोगों पर भी अध्ययन किया जा रहा है।
केंद्र के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया, “हमारा लक्ष्य बॉटल ब्रश को एक बहुपयोगी फसल के रूप में विकसित करना है, जिससे किसान केवल एक उत्पाद पर निर्भर न रहें। इसकी खेती से वे फूलों की बिक्री से तुरंत आय प्राप्त कर सकते हैं और साथ ही आवश्यक तेल उत्पादन से दीर्घकालिक और अधिक आकर्षक लाभ कमा सकते हैं।”
किसानों के लिए संभावनाएं:
यदि यह शोध सफल होता है और बॉटल ब्रश की खेती व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य साबित होती है, तो यह उत्तराखंड के किसानों के लिए एक गेम चेंजर साबित हो सकती है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां पारंपरिक खेती से लाभ कम हो रहा है, बॉटल ब्रश एक टिकाऊ और लाभदायक विकल्प प्रदान कर सकता है। इससे कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा, जिससे मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार होगा और पारिस्थितिकी तंत्र को भी लाभ होगा।
आने वाले समय में, सगंध पौध केंद्र सेलाकुई इस शोध के परिणामों को किसानों तक पहुंचाने और उन्हें बॉटल ब्रश की खेती के लिए प्रशिक्षित करने की योजना बना रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह अभिनव पहल उत्तराखंड के कृषि परिदृश्य में क्या बदलाव लाती है।

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